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बृहस्पति जन्मकुण्डली में 1, 2, 3, 4, 5 व 12वें घर में शुभ फल देता है। यदि बृहस्पति जन्मकुण्डली में अकेला बैठा हो तो वह किसी प्रकार का अशुभ फल नहीं देता है। बृहस्पति के अशुभ होने पर सिर के बाल उड़ जाते हैं। शिक्षा अधूरी रह जाती है। मान-सम्मान पर प्रभाव पड़ता है तथा गले में विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
उपाय: बृहस्पतिवार का व्रत रखें। साधु-महात्माओं की सेवा करें। केसर का सेवन करें तथा सोने की अंगूठी धारण करें। पीले फूल व फलों से ब्रह्माजी की पूजा करें तथा फलों को प्रसाद के रूप में वितरण करें। मस्तक पर पीला चंदन, हल्दी अथवा केसर का तिलक करें। पीपल वृक्ष में पानी डालें तथा उसकी देखभाल करें। केसर, हल्दी, चने की दाल, सोना अथवा कोई पीली वस्तु मंदिर में दान करें। बादाम कपड़े में बांधकर लोहे के पात्र में बंद कर अपने पास रखें और उसे कभी खोलकर न देखें। बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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