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रमजान पाक के मुकद्दस महीने में शबे कद्र का अपना अलग स्थान है। इस्लाम में इस बात की मान्यता है कि शबे कद्र हजार महीने से बेहतर है। इस रात में इबादत करने से हजार रात में इबादत का सवाब मिलता है। अल्लाह इस दौरान के इबादत का सबसे अधिक ख्याल रखता है।
यह बात मदरसा खदीजतुल कुबरा के टीचर अहमद आजम कासमी ने कही। उन्होंबने कहा कि रमजान की अंतिम दस रातें शबे कद्र की होती हैं। इस रात में जो भी रोजेदार इबादत करता है उसकी अल्लाताला मुराद पूरी करता है। अल्लाह से जो भी मांगा जाए उसे वह पूरा करता है। सच्ची तौबा और माफी दोनों मिलता है। मान्यता है कि इस रात में फरिस्तों के सरदार जिबरईल अमीन हरे झंडे के साथ फरिस्तों की एक फौज लेकर जमीन उतरते हैं। झंडे को काबे की दीवार पर गाड़ कर फरिस्तों को हुक्म देते हैं कि जो भी बंदा आज की रात में इबादत, जिक्र, नमाज, दुआ में जुटा हो उसे सलाम करें, उनकी दुआ पर आमीन कहें। यह सिलसिला सूरज निकलने तक जारी रहता है। इस मंजर को इंसान और जिन्नात के अलावा सभी देखते हैं।

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