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पैगम्बर साहब ने फरमाया कि जो कोई रमजानुल मुबारक में रोजेदार को पानी पिलाए तो वो अपने गुनाहों से इस तरह पाक व साफ हो जाएगा गोया अभी अपनी मां के पेट से पैदा हुआ हो। सहाबा ने अर्ज किया या रसूलल्लाह ये हुक्म घर पर है या सफर में या उस जगह जहां पानी न मिलता हो ?
यह बातें मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया इमामबाड़ा दीवान बाजार के सहायक अध्यापक मोहम्मद आजम ने कहीं। धर्मचक्र से बातचीत में उन्होंने कहा कि पैगम्बर ने फरमाया कि यह हुक्म आम है अगरचे फुरात नदी के किनारे पर भी पानी पिला दे। अल्लाह का अपने बंदों पर किस कद्र एहसान है कि पानी जैसी अजीम नेअ़मत हमें बिल्कुल मुफ्त दी और दूसरों को पिलाने पर हमें बे हद सवाब भी अता फरमाया है। हदीस में है जिसने मुसलमान को वहां पानी का घूंट पिलाया जहां पानी मिलता है तो गोया गरदन यानि गुलाम को आजाद किया और जिसने मुसलमान को ऐसी जगह पानी पिलाया जहां पानी नहीं मिलता तो गोया उसे जिन्दा कर दिया और माहे रमजान में अपने रोजादार भाई को पानी पिलाने वाले के तो सारे गुनाह ही मुआ़फ़ फरमा दिए जाते हैं। रोजादार किस तरह खुशनसीब है कि चाहे जाग रहा हो या सो रहा हो हर वक्त ही वो इबादत में है गोया उसकी हर सांस अल्लाह की इबादत में गुजर रही है। उस खुशनसीब के लिए हदीस के मुताबिक सुबह व शाम सत्तर- सत्तर हजार फरिश्ते मगफिरत की दुआ मांगते रहते हैं, उसका बिस्तर, लिबास, उसकी नअलैन आदि दुआएं देती हैं।
-मोहम्मद आजम सहायक अध्यापक मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया, इमामबाड़ा दीवान बाजार

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