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मुफ्ती अख्तर हुसैन ने बताया कि पैगम्बर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि जो कोई रमजानुल मुबारक में रोजादार को पानी पिलाएं तो वो अपने गुनाहों से इस तरह पाक व साफ हो जाएगा गोया अभी अपनी मॉं के पेट से पैदा हुआ हो। सहाबा ने अर्ज किया या रसूलुल्लाह ये हुक्म घर पर है या सफर में या उस जगह जहॉं पानी न मिलता हो ? पैगम्बर ने फरमाया कि यह हुक्म आम है अगरचे फुरात नदी के किनारे पर भी पानी पिला दे।
अल्लाह का अपने बंदों पर किस कद्र एहसान है कि पानी जैसी अजीम नेअ़मत हमें बिल्कुल मुफ्त दी और दूसरों को पिलाने पर हमें बे हद सवाब भी अता फरमाया है। हदीस में है जिसने मुसलमान को वहॉं पानी का घूंट पिलाया जहॉं पानी मिलता है तो गोया गरदन यानि गुलाम को आजाद किया और जिसने मुसलमान को ऐसी जगह पानी पिलाया जहॉं पानी नहीं मिलता तो गोया उसे जिन्दा कर दिया और माहे रमजान में अपने रोजादार भाई को पानी पिलाने वाले के तो सारे गुनाह ही मुआ़़फ़ फरमा दिए जाते हैं। रोजादार किस तरह खुश नसीब है कि चाहे जाग रहा हो या सो रहा हो हर वक्त ही वो इबादत में है गोया उस का हर हर सांस अल्लाह की इबादत में गुजर रहा हैं उस खुश नसीब के लिए एक हदीस में मुताबिेक सुब्ह व शाम सत्तर सत्तर हजार फिरिश्ते मगफिरत की दुआ मॉंगते रहते है उसका बिस्तर, लिबास, उसकी नअलैन आदि उस को दुआएं देती है।

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