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मौलाना रियाजुद्दीन ने बताया कि हदीस में है कि पैगम्बर मोहम्मद साहब का फरमाने आलीशान है कि जो माहे रमजान शरीफ में किसी मजलिसे जिक्र में शिरकत करता है, अल्लाह उसके हर कदम के बदले में एक-एक साल की इबादत का सवाब लिखता है और बरोजे कियामत वह अर्श के साए में होगा। और जो कोई रमजान शरीफ में नमाजे बा जमाअत पर मुदावमत करता है, अल्लाह तबारक व तआला उस खुशनसीब को हर रकअत के बदले में नूर का एक शहर अता फरमाएगा जो कोई माहे रमजान में अपने वालिदैन के साथ एहसान करेगा, अल्लाह उसकी तरफ निगाहें रहमत और जमीन में यानी हमारे आका पैगम्बर मोहम्मद साहब उसके जिम्मेदार हों। जो कोई माहे रमजान में किसी मुसलमान की हाजत यानी जरूरत पूरी करता है अल्लाह उसकी दस लाख हाज़तें पूरी फरमाता है। जो इस माहे मुबारक में किसी बाल बच्चेदार फकीर को खैरात देता है अल्लाह उसके लिए दस लाख नेकियां लिखता है और उसके दस लाख गुनाह माफ फरमा देता है और दस लाख दर्जात बुलन्द फरमाता है।

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