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हाजी औरंगजेब ने बताया कि पैगम्बर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि सेहरी खाया करो। क्योंकि सेहरी में बरकत है। अल्लाह तआला और उसके फरिश्ते सेहरी खाने वालों पर रहमत नाजिल फरमाते हैं। पैगम्बर साहब जब अपने किसी साथी को सेहरी खाने के लिए बुलाते तो इरशाद फरमाते कि आओ बरकत का खाना खा लो। सेहरी हमारे लिए एक अजीम नेअमत है, जिससे बेशुमार जिस्मानी और रूहानी फवाइद हासिल होते हैं। इसीलिए आपने इसे मुबारक नाश्ता कहा है।
शुरुआत में रात को उठकर सेहरी करने की इजाजत नहीं थी। रोजा रखने वाले को सूर्य अस्त के बाद सिर्फ उस वक्त तक खाने, पीने की इजाजत थी जब तक वो सो न जाए। अगर सो गया तो अब जागने पर खाना- पीना मना था। मगर अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों पर अहसान अजीम फरमाते हुए सेहरी की इजाजत मरहमत फरमाया। किसी को ये गलफहमी न हो जाए कि सेहरी रोजे के लिए शर्त है। ऐसा नहंीं है। सेहरी के बगैर भी रोजा हो सकता है। मगर जानबूझकर सेहरी न करना एक अजीम सुन्नत से महरूमी है और यह भी याद रहे कि सेहरी में खूब डटकर खाना ही जरूरी नहीं। चंद खजूरें और पानी ही अगर ब नियते सेहरी इस्तेमाल कर लें तब भी सुन्नत काफी है।

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