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मदरसा दारूल उलूम दीवान बाजार के मौलाना मुफ्ती अख्तर हुसैन ने बताया कि पैगम्बर मोहम्मद साहब का इरशाद है कि रजब अल्लाह तआला का महीना है और शअ्बानुलमुअज्जम मेरा महीना है और रमजानुलमुबारक मेरी उम्मत का महीना है। रजब की फजीलत तमाम महीनों पर ऐसी है जैसी कुरआन शरीफ की फजीलत तमाम किताबों पर और शअ्बानुलमुअज्जम को दूसरे महीनों पर वैसी ही बुजुर्गी है जैसे तमाम अम्बिया पर मुझे है और रमजानुलमुबारक को तमाम महीनों पर ऐसी ही फजीलत है जैसे अल्लाह तआला को तमाम मखलूक पर। पैगम्बर साहब ने फरमाया, अल्लाह तआला फरमाता है कि हरएक अम्ल इब्ने आदम का बढा दिया जाता है, एक नेकी की दस नेकियां लिखी जाती है। और इस से भी ज्यादा यहां तक कि सात सौ तक मगर रोजा का सवाब इतना है कि इस की हद को मैं ही खूब जानता हूं और इस का बदला अपने बंदों को मैं खुद ही दूंगा। अल्लाह तआला कुरआन शरीफ में फरमाता है कि रमजानुलूमुबारक का महीना (ऐसा बाबरकत है) कि जिसमें कुरआन मजीद नाजिल हुआ जो लोगों का रहनुमा और इस में हिदायत व इम्तियाजे हक व बातिल का साफ साफ हुक्म है मुसलमानों रमजानुलमुबारक का महीना तुम्हारे पास आया जो बरकत वाला है। इस मुबारक महीने में अल्लाह तआला रहमत के साथ तुम्हारी तरफ मुतवज्जे: होता है और तुम पर मेहरबानी फरमाता है, तुम्हारे गुनाहों को बख्शता है, तुम्हारी दुआएं कुबूल फरमाता है और ये देखता है कि तुम लोग रमजानुलमुबारक के वास्ते क्या-क्या शौक व रगबत रखते हो और सवाब के कामों में कितनी मशक्कत बर्दाश्त करते हो। अल्लाह तआला फरिश्तों के सामने तुम्हारी तारीफ करता है, देखों मेरे बंदे भूख और प्यास की तकलीफ उठाकर, अपनी जरूरतों को छोडकर मेरी इबादत में कैसे लगे हुए हैं। हम केा भी लाजिम है कि इस मुबारक महीने में अल्लाह और उसके रसूल के अहकाम पूरे-पूरे बजा लाने की कोशिश करें। सुस्ती, गफलत व नाफरमानी से दूर रहकर इस मुबारक महीने के एक-एक मिनट की कदर करें। दुआ है कि अल्लाह तआला तमाम मुसलमानों को व तुफैल रहमतुललिलआलमिन के इस मुबारक महीने में इबादत और नेक काम करने की तौफीक अता फरमया और इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि कहीं रमजानुलमुबाकर की रूखसती के साथ हमारी इबादत और नेक काम भी रूखसत न हो जायें।

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