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कारी अनीस ने कहा कि पैगम्बर साहब ने फरमाया कि हमेशा लोग खैर के साथ रहेंगे जब तक अफ्तार में जल्दी करेंगे। जैसे ही गुरूबे आफताब का यकीन हो जाए बिला ताखीर खजूर या पानी वगैरह से रोजा खोल लें और दुआ भी अब रोजा खोलकर मांगें ताकि अफ्तार में किसी किस्म की ताखीर न होने पाए। पैगम्बर साहब ने फरमाया कि मेरी उम्मत मेरी सुन्नत पर रहेगी जब तक अफ्तार में सितारों का इंतजार न करें। इस हदीस पाक में भी अफ्तार में जल्दी करने की ताकीद फरमायी गई है और ये बिशारत भी दी गयी है कि जब तक मेरी उम्मत अफ्तार में जल्दी करेगी मेरी सुन्नत पर कायम रहेगी। सूरज गुरूब होने के बाद अफ्तार करने में इतनी देरी न करें कि आसमान पर सितारे टिमटिमाने लग जाएं। इतनी देरी करने से मना फरमाया गया है। इसी तरह नमाज ए मगरिब में भी बिला किसी उज्रे शरई सफर व मर्ज वगैरह इतनी ताखीर कर देना कि सितारे जाहिर हो जाएं मकरूह तहरीमी है। पैगम्बर साहब ने फरमाया कि अल्लाह तआला ने फरमाया मेरे बंदों में मुझे ज्यादा प्यारा वो है जो अफ्तार में जल्दी करता है। अल्लाह का प्यारा बनना है तो अफ्तार के वक्त किसी किस्म की मश्गूलियत न रखो, बस फौरन अफ्तार कर लो। पैगम्बर साहब ने फरमाया कि जब तुम में कोई रोजा अफ्तार करे तो खजूर या छुहारे से अफ्तार करे कि वो बरकत है और अगर न मिले तो पानी से कि वो पाक करने वाला है।

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