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अखंड सौभाग्य का व्रत करवाचौथ पर्व शनिवार को आस्था व श्रद्धा के साथ परंपरागत रूप से मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं निर्जल व्रत रहेंगी। शाम को गणपति की पूजा व चंद्रमा को अघ्र्य देकर अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करेंगी।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र के अनुसार शनिवार को सूर्योदय 6.13 बजे व तृतीया तिथि का मान दिन में 12.32 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी लग जाएगी। चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय 7.57 बजे है। इसके बाद ही चंद्रमा को अघ्र्य दिया जाएगा। पति-पत्नी के बीच प्रेम, त्याग व उत्सर्ग की भावना का रोपण करने वाले पर्व की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
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कैसे करें व्रत
दिन भर निर्जल व निराहार रहकर सायंकाल एक पाटे पर जल भरा पात्र रखें और मिट्टी का करवा लेकर उसमें गेहूं भरे और उसके ढक्कन में चीनी भर लें। पास में एक रुपया भी रख दें। करवा पर स्वास्तिक बनाकर तेरह बिंदी दें तथा हाथ में गेहूं के तेरह दाने लेकर व्रत महात्म्य की कहानी सुनें। फिर करवे पर उसे अर्पित कर दें। चंद्रमा के उदय होने पर अघ्र्य देकर, पति को भोजन कराकर स्वयं भोजन करें।
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हो सकता है व्रत का प्रारंभ
यह व्रत विवाह वर्ष से ही महिलाएं रहना शुरू करती हैं। शास्त्रीय विधानों के अनुसार जब शुक्र व गुरु अस्त हो तो इस व्रत का प्रारंभ नहीं किया जाता है। इस बार शुक्र 2 अक्टूबर से अस्त चल रहा है। इसलिए प्रथम बार व्रत शुरू करने वाली महिलाओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र ने कहा कि शुक्र ग्रह की पूजा-अर्चना, उपासना व उनसे संबंधित वस्तुओं का दान कर इस व्रत को प्रारंभ किया जा सकता है।

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