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'ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्यधिपतये धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।Ó यह कुबेर मंत्र धर्मस्थान या शिव मंदिर में द्विपुष्कर या त्रिपुष्कर योगों में अथवा दीपावली या नवरात्र में या किसी भी शुभ मुहूर्त में प्रारंभ करके सवा लाख की संख्या में जप करें। प्रतिदिन नियमित रूप से तीन अथवा एक माले का जपा या उससे अधिक अपनी सामथ्र्य अनुसार करें। संपूर्ति पर ब्राह्म्ण दंपति को भोजन कराना शुभ रहेगा।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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