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बहुत से लोगों को रोजगार अथवा वैवाहिक दृष्टि से विदेश जाने की इच्छा रहती है, परन्तु किन्हीं कारणों से विघ्न-बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्हें निम्न मंत्र का जप करना शुभ रहेगा-
ऊं अनंग वल्भायै विदेश गमनाय कार्य सिद्धयर्थे नम:।
विधि- किसी भी शुक्ल पक्ष के शुभ शुक्रवार को प्रात: स्नानादि के पश्चात स्वच्छ कपड़े पहनकर सफेद रंग के सूती आसन पर बैठकर अपने सामने एक लकड़ी के पट्टे पर सफेद वस्त्र को बिछाकर, उस पर दक्षिणवर्ती शंख रखकर केसर से स्वास्तिक चिह्न या तिलक लगाकर श्रद्धापूर्वक उपरोक्त मंत्र का 3100 बार जप स्फटिक की माला से करें। मंत्र जप समाप्त होने पर उस सफेद वस्त्र में दक्षिणावर्ती शंख को भलीभांति लपेटकर अपने पूजा स्थल पर रख देने से विदेश भ्रमण की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430बी, आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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