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तीन से पांच बार करें। खर्राटे, तुतलाना व थाइराइड से ग्रसित लोग 10 से 20 बार करें
विधि- गले को सिकोड़ते हुए दोनों नासिकाओं से श्वांस अंदर इस प्रकार भरें कि गले से आवाज हो। अगर सही न बन सके तो दाढ़ी को कंठ से लगाकर करने से सही अभ्यास होने लगता है। शुरू में उज्जयी टुकड़ों में करें। अभ्यास होने पर पूरी आवृत्ति करें, श्वांस भर जाने पर सामर्थ्य‍ के अनुसार श्वांस रोकें, बेचैनी होने से पहले दायीं नासिका को बंद कर बायीं नासिका से निकाल दें।
लाभ- थाइराइड, खर्राटे, स्लीपएस्निया, कंठ विकार, टांसिल, बच्चों का तुतलाना, हकलाना, गले का रोग।
द्वारा पतंजलि योग समिति, गोरखपुर

Keywords: yoga

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