0
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने बताया कि बाअज अवकात हमारे इस्लामी भाई या बहन को जब रोजे मंें कय(उल्टी) हो जाती है तो वो परेशान हो जाते हैं। काफी ऐसे भाई भी देखे हैं जो ये समझते है कि रोजे में खुद बा खुद कय हो जाने से भी रोजा टूट जाता है। हलांकि ऐसा नहीं हैं।
रोजे में खुद ब खुद कितनी ही कय (उल्टी) हो जाए बाल्टी ही क्यों न भर जाए इससे रोजा नहीं टूटेगा।
अगर रोजा याद होने के बा वुजूद कसदन कय की और अगर वो मुंह भर है तो अब रोजा टूट जाएगा। अगर कयमें सिर्फ बलगम निकला तो रोजा नहीं टूटेगा।
भूलकर खाया, पिया या जिमाअ किया रोजा फासिद न हुआ, ख्वाह वो फर्ज हो या नफ्ल।
रोजा याद होने के बा वुजूद भी मक्खी या गुबार या धुवॉं हल्क में चले जाने से रोजा नहीं टूटता। ख्वाह वो गुबार आटे का हो जो चक्की पीसने या आटा छानने में उड़ता है या गल्ला का गुबार हो या हवा उसे खाक उड़ी या जानवरों के खुर या टाप से।
बस या कार का धुंवा या उनसे गुबार उड़कर हल्क में पहुंचा अगरचे रोजादार होना याद था। रोजा नहीं जाएगा।

अगर बत्ती सुलग रही है और उसका धुवॉं नाक में गया तो रोजा नहीं टूटेगा, हॉं अगर लोबान या अगर बत्तीसुलग रही हो और रोजा याद होने के बावुजूद मुंह करीब ले जाकर उसका धुंवा नाक से खींचा तो रोजा फासिद हो जाएगा।
तेल या सुरमा लगाया तो रोजा न गया अगरचे तेल या सुरमा का रंग भी दिखाई देता हो जब भी रोजा नहीं टूटता।
गुस्ल किया और पानी की खुश्की(ठन्डक) अन्दर महसूस हुई जब भी रोजा नहीं टूटा। कुल्ली की और पानी बिल्कुल फेंक दिया। सिर्फ कुछ तरी मुंह में बाकी रह गई थी थूक के साथ इसे निगल लिया। रोजा नहीं टूटा।
कान में पानी चला गया जब भी रोजा नहीं टूटा। बल्कि खुद पानीडाला जब भी न टूटा।
तिन्के से कान खुजाया और उस पर कान का मैल लग गय फिर वही मैल लगा हुआ तिनका कान में डाला गया अगरचे चन्द बार ऐसा किया हो। जब भी रोजा न टूटा।
दॉंत या मंुह में खफीफा (यानि मामूली) चीज बे मालूम सी रह गई कि लुआब के साथ खुद ही उतर जाएगी और वो उतर गई, रोजा नहीं टूटा।
दॉंतों से खून निकलकर हल्क तक पहुंचा मगर हल्क से नीचे न उतरा तो इन सब सूरतों मंें रोजा न गया।
मक्खी हल्क में चली गयी रोजा न गया और कसदन निगली तो चला गया।
तिल या तिल के बराबर कोई चीज चबाई और थूक के साथ हल्क से उतर गई तो रोजा न गया मगर जबकि उसका मजा हल्क में महसूस होता हो तो रोजा जाता रहा।
थूक या बलगम मुंह में आया फिर उसे निगल गए तो रेाजा न गया।
इसी तरह नाक में रींठ जमअ हो गई, सांस के जरीअे खीच कर निगल जाने से भी रोजा नहीं जाता।

Keywords: islam

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top