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जिन हाथों ने जुर्म का दामन थामा। जुर्म से अपने हाथ रंगे। जब हाथ उठा तो दूसरों को तकलीफ देने के लिए। आज वहीं हाथ खुदा की बारगाह में उठ रहे है। खुदा की रहमत का नूर जिला कारागार में झमाझम बरस रहा है। पाक रमजान माह के फैज से दुनिया का हर खित्ता मुनव्वर है। भला जिला कारागार इससे कैसे अछूता रहता। खुदा की इबादत की खुमारी कैदियों पर छायी हुई है। चारों तरफ खुदा का नूर। सुबह शाम इबादतें इलाही। खुदा की याद में दिन रात बसर। सेहरी का मजाए अफ्तार की भूख, कुरआन शरीफ की तिलावतए नमाज का वसूल, रोजे की रूहानियत सब कुछ मौजूद है जिला कारागार में।
सलाखों के पीछे रजा-ए-इलाही तलाश कर रहे कैदी, चैकिये मत। यह हकीकत है। हत्या, ब्लात्कार जैसे संगीन अपराधी भी रजा-ए-इलाही में सज्दा-ए-खुदा कर रहे है। जिला कारगार में करीब 110 कैदी रोजेदार है। जिसमंे 5 महिलाएं शामिल है। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल देखिये मुस्लिम तो रोजा रह रहे है इसमें हिन्दू कैदी भी पीछे नहीं। हिन्दू रोजेदार में 4 पुरूष व 2 महिलाएं है। इन्हें तमाम सुविधाएं मुहैय्या करा रहा है जिला कारागार प्रशासन। यहां पर सेहरी, अफ्तार व भोजन का मुकम्मल इंतजाम है। नमाज भी पढ़ी जाती है। कुरआन शरीफ की तिलावत भी होती है। खुदा की हम्द व सना भी होती है। तरावीह की नमाज पढ़ी जा रही है। यहां पर मुसलमान कैदियों में 90 प्रतिशत लोग रोजे से रह रहे है। बैरक नं. 1 में 17, बैरक नं. 2 में 18, बैरक नं. 9 में 4, पाकशाला मेें 6, बैरक नं. 4 तंहाई में 4, बैरक नं. 5 में 2, बैरक नं. 6 में 3, बैरक नं. 7 में 18, बैरक नं. 8 में 33 लोग रोजादार है। इसी तरह महिला बैरक में 5 महिलाएं रोजा है। जिसमें दो महिलाएं रोजे से है।
मुसलमान कैदियों के साथ विजय बैरक नं. 1 में तो बैरक नं. 2 में बृजेश, बब्लू, सोहन तो बैरक नं. 7 में सुरेन्द्र तो महिला बैरक में आशा व मुन्नी रोजे से है।
कैदियों ने अपनी गंगा जमुनी तहजीब को यहां भी कायम रखा। न जाने कौन सी मजबूरियां थी। जिस वजह से इन्होंने जुर्म का रास्ता अख्तियार किया। खैर वह है अपना अपना रास्ता, वह है बात अपने मिजाज की।
इन कैदियों के लिए कारागार प्रशासन ने हर बार की तरह विशेष व्यवस्था की है।

वरिष्ठ अधीक्षक कारागार गोरखपुर एसके शर्मा ने बताया कि कैदियों को सेहरी अफ्तार के लिये प्रत्येक कैदी को बिस्किट, पाव, चीनी, 30 ग्राम चीनी, 200 ग्राम दही, 250 ग्राम मौसमी फल, नीबू, दूध व गुड़ आदि दिया जा रहा है। चूंकि इनके खाने की टाइमिंग बदली रहती है। इसलिए अलग से राशन चावल, दाल, मसाला, आटा की व्यवस्था की गयी। इनका खाना अलग से बनवाया जा रहा है। खाने की जिम्मेदारी इन्हीं कैदियों के सुपुर्द कर दी गयी है ताकि इन्हें किसी किस्म की तकलीफ न होने पाये। इबादत के लिए भी खास इंतेजाम किया गया। जुमे के लिए बाहर से इमाम साहब को बुलाया जाता है। जुमे की नमाज मुस्लिम कैदी बाजमात अदा करते है। वहीं अन्य नमाजों को बैरक में अदा किया जाता है। बैरक के अन्य कैदी मिलजुल कर नमाज बा जमात पढ़ते है। तरावीह की नमाज भी पढ़ी जा रही है।
रोजेदार कैदियों का विवरण
बैरक नं. 1
साहेब, हसन, शेरू, शेखू, विजय, फिरोज, वसीम, मेराज, अनवर, खुशबु़द्वीन, खुर्शीद, फिरोज, सलमान, अफजल, सदरे आलम, मुर्तुजा, शहाबदुद्ीन,
बैरक नं. 2
रशीद, अशफाक, शमीम, सलीम, मुस्तफा, नदीम, जुनैद, मुनीर, मोहम्मद हुसैन, फसरू, आस मोहम्मद, सोनू, धेनी, बबलू, सोहन, खुर्शीद, चमन
बैरक नं. 9
अमिनु, हैदर, अलाउल मुस्तफा, शमशाद,
बैरक संख्या 4 तंहाई
हैदर अली, अली अहमद, आफताब, जहरूद्दीन
बैरक नं. 5
साहिल, नौशाद
बैरक नं. 6
रिजवान, जाफर, जमालू
बैरक नं. 7
शब्बू, सुरेन्द्र, मुस्लिम, हामिद, मैनुद्दीन, सुडडू, इसराईल, अली हुसैन, लल्लू खां, नूरहसन , अब्दुल, सैमुल, शहाबुद्दीन, शौकत, उरूज आफाक, शेख हसनैन, परवेज, हैदर,
बैरक नं. 8
रफीक, मुकरीन, शेरू, यासीन, मोहम्मद असगर, मोहम्मद शमीम, ईद मोहम्मद, मुमताज, शेखू, आलम, अलाउद्दीन, साहिद, क्यामुद्दीन, शाहिद, मुन्ना, वाहिद, इरशाद, राशिद, रेहान, राहत, प्रदीप, झीनक, शमसाद, मुस्तफा, लाल मोहम्मद, औरंगजेब, गुगुल दीवान, जामिन, हामिद, छेदी, अली उर्फ गोलू, आमिर
महिला बैरक
शबाना, छबीला, रशीदा, आशा, मुन्नी
हिन्दू रोजेदार
आशा, मुन्नी, विजय कुमार, सुरेन्द्र, बृजेश, बब्लू, सोहन,

Keywords: islam, gatividhiyan

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