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जिस वर्ष में दो आषाढ़ आवें तो उस वर्ष किसी प्रदेश में खंड वर्षा अर्थात रुक रुक कर अल्प वर्षा हो, किसी प्रदेश में विषम वर्षा एवं प्राकृतिक प्रकोपों के कारण फसलों को हानि तथा कुछ प्रदेशों में अच्छा उत्पादन होने पर भी प्राकृतिक आदि प्रकोपों से लोगों को कष्टपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़े। एक मतानुसार जब आषाढ़ अधिक हो तो पुण्य, यश, सुभिक्ष तथा प्रजा को अधिक सुख प्राप्त होता है। भविष्य पुराण के अनुसार पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त जो व्रत, उपवास, स्नान, दान या पूजन आदि किए जाते हैं वह अक्षय फल देने वाले होते हैं। हेमाद्रि के अनुसार पुरुषोत्तम मास आरंभ होने पर प्रात: स्नानादि नित्यकर्म से निवृत्त होकर एकभुक्त या नक्तव्रत रखकर भगवान विष्णु स्वरूप सूर्य का मंत्रों द्वारा लाल पुष्प सहित पूजन एवं स्तोत्र पाठ कर कांस्य पात्र में भरे हुए अन्न, फल, वस्त्रादि का दान किया जाता है। पूजनोपरांत अथवा अधिक मास के अंतिम दिन विविध प्रकार के घी, गुड़ और अन्न का दान करें तथा घी, गेहूं के बनाए हुए तैंतीस पुओं को पात्र में रखकर फलों, मिष्ठान, वस्त्र, दक्षिणा सहित ब्राह्म्ण को दान करें और भगवान विष्णु से कल्याण की कामना करें। इसके अलावा प्रतिदिन श्री पुरुषोत्तम महात्म्य का पाठ श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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