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यदि विरोधी अथवा शत्रु अन्याय पूर्वक तंग कर रहा है अथवा राजकीय रुकावट के कारण उपयुक्त पदोन्नति नहीं मिल पा रही है या व्यवसाय में गुप्त शत्रु हानि पहुंचाने का यत्न कर रहे हैं अथवा अनावश्यक रूप से झगड़े आदि में फंसाया जा रहा है तो इसमें बगलामुखी मंत्र विशेष सहायक है। साधक को गुरु या किसी विद्वान से बगला मंत्र को जानकर ब्रह्म्चर्य पूर्वक देवी मंदिर में, ऊंचे स्थान पर, शिवालय में, गुरु के समीप या एकांत में जैसी सुविधा हो बगलामुखी मंत्र जपना चाहिए। महाविद्या बगलामुखी का 36 अक्षरों का मंत्र इस प्रकार है-
ऊं ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वा कीलय बुद्धि विनाशय ह्लीं ऊं स्वाहा।
मंत्र के जप के विषय में बगलापटल (सिद्धेश्वर तंत्र) में विशेष विधान बताया गया है, जो इस प्रकार है-
बगला के जप में पीले रंग का विशेष महत्व है। जपकर्ता को पीला वस्त्र पहनकर हल्दी की गांठ की माला से जप करना चाहिए। देवी की पूजा और होम में पीले पुष्पों का प्रयोग करना चाहिए। स्नान कर पीले वस्त्र पहनकर साधक पूर्वाभिमुख बैठकर ही जप करे। उसे ब्रह्म्चर्य का पालन अनिवार्यत: करना चाहिए। जप के पूर्व पूर्वाभिमुख बैठकर आसन शुद्धि, भू शुद्धि, अंगन्यास, करन्यास आदि करना चाहिए। जप संख्या एक लाख कही गई है। विशेष बात यह है कि प्रतिदिन जप के अंत में दशांश होम पीले पुष्पों या पीली सरसो या हल्दी के चूर्ण से करनी चाहिए।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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