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स्वतंत्र भारत की 69वें वर्ष की कुंडली में गुरु ग्रह, मित्र चंद्रमा व शुभ ग्रह बुध के साथ विदेश व संपर्क स्थान पर स्थित होगा। इसलिए विदेशों से पूंजी निवेश की पूर्ण संभावना बन रही है। यह पंचम पूर्ण दृष्टि से सुख, भूमि, वाहन को देख रहा है। इसलिए कृषि कार्यों में सरकार की अभिरुचि जाग्रत होगी। सुख के संसाधनों में अभिवृद्धि का योग मिलेगा। कृषि, सिंचाई के लिए देश के प्रमुख नदियों को जोडऩे की नीति में प्रगति एवं वाहनों के निर्माण में पूर्व वर्षों की अपेक्षा ज्यादा उत्थान का योग मिलेगा। सप्तम दृष्टि से शत्रु और नवम दृष्टि से पुरातत्व को देख रहा है। इसलिए कूटनीतिक तरीके से शत्रुगण पराजित होंगे। भारत का सांस्कृतिक उत्थान विश्व पटल पर होगा। अष्टम स्थान पर गुरु की दृष्टि के कारण मौसम में प्रतिकूलता और प्राकृतिक प्रकोप की संभावना है। तीर्थ यात्रा, पर्यटन आदि विभिन्न योजनाओं द्वारा विकास की गति में तेजी आएगी। आम जनता के मध्य सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा परन्तु भ्रष्टाचार और महंगाई का मुद्दा आम आदमी को उद्वेलित और आंदोलित करता रहेगा।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी, आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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