0
कुछ लोग कहते हैं कि कुंभ पर्व का प्रारंभ कान से हुआ, इसका ठीक-ठीक निर्णय करना कठिन है। वेदों में कुंभ पर्व का आधार सूत्रों-मंत्रों में वर्णित है, जबकि पुराणों में चार कथाओं का उल्लेख मिलता है जिसमें भगवान शिव व गंगाजी की कथा, महर्षि दुर्वासा की कथा, कद्रू विजता की कथा, समुद्र मंथन की कथा आदि। स्कंदपुराण के अनुसार एक समय भगवान विष्णु के निर्देशानुसार देवों व असुरों ने मिलकर संयुक्त रूप से अमृत कुंभ प्राप्ति के लिए क्षीरोद सागर का मंथन किया था जिसमें पहले हलाहल विष उत्पन्न हुआ जिसे भगवान शिव ने पी लिया। इसके सहित कुल चौदह रत्न उत्पन्न हुए जिसमें 13वें रत्न के रूप में धनवंतरि थे जिनके हाथ में अमृत कुंभ था। भगवान विष्णु की कृपा से वह अमृत कुंभ इंद्र को प्राप्त हुआ। देवताओं के संकेत पर इंद्र पुत्र जयंत अमृत कुंभ को लेकर भागने लगे। दैत्य गण जयंत का पीछा करने लगे। अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं व दैत्यों के मध्य बारह वर्ष तक भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में अमृत की रक्षा करते हुए पृथ्वी के जिन-जिन स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरीं उन-उन स्थानों- प्रयाग, उज्जैन, हरिद्वार व नासिक, में कुंभ पर्व मनाया जाता है।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

Keywords: hindu

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top