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मक्का मस्जिद मेवातीपुर के नायब पेश इमाम हाफिज मोहम्मद आलम शाह ने बताया कि पैगम्बर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि ऐ लोगों तुम्हारे पास अजमत वाला बरकत वाला महीना आया वह महीना जिसमें एक रात हजार महीनों से बेहतर है उसके रोजे अल्लाह तआला ने फर्ज किए और उसकी रात में कयाम नमाज पढ़ना ततव्वा (यानी सुन्नत) जो इसमें नेकी का कोेई काम करे तो ऐसा हे जैसे और किसी महीने में फर्ज अदा किया और इसमें जिसने फर्ज अदा किया तो ऐसा है जैसे और दिनों में सत्तर फर्ज अदा किए। यह महीना सब्र का है और सब्र का सवाब जन्नत है। इस महीने में मोमिन का रिज्क बढ़ा दिया जाता है। इसमें रोजादार को इफ्तार कराये उसके गुनाहों के लिए मग्फिरत है और उसकी गर्दन आग से आजाद कर दी जायेगी। इफ्तार करने वाले को वैसा ही सवाब मिलेगा जैसा रोजा रखने वालों को मिलेगा बगैर उसके कि उसके अज्र में से कुछ कम हो। पैगम्बर साहब ने फरमाया अल्लाह तआला यह सवाब उस शख्स को देगा जो एक घंूट दूध या एक खुरमा (छुआरा) या एक घूंट पानी से इफ्तार कराए या जिसने रोजादार को भरपेट खाना खिलाया उसको अल्लाह तआला मेरे हौज से पिलायेगा कि कभी प्यासा न होगा यहां तक कि जन्नत में दाखिल हो जाए। यह वह महीना है कि इसका अव्वल रहमत है। और इसका औसत मगफिरत है और उसका आखिर जहन्नम से आजादी है। जो अपने गुलाम पर इस महीने में तखफीफ करे यानी काम में कमी करे अल्लाह तआला उसे बख्श देगा और उसे जहन्नम से आजाद फरमायेगा। जन्नत के आठ दरवाजे है उनमें एक दरवाजे का नाम रय्यान है इस दरवाजे से वही जायेंगे जो रोजे रखते है। जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए रोजा रखेगा उसके अगले गुनाह बख्श दिये जायेंगे और जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए रमजान की रातों का कयाम करेगा उसके अगले गुनाह बख्श दिये जायेंगे और जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए रमजान की रातों का कयाम करेगा से अगले गुनाह बख्श दिये जायेंगे और जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए शबे कद्र का कयाम करेगा उसके अगले गुनाह बख्श दिये जायेंगे। पैगम्बर साहब फरमाते है कि आदमी के हर नेक काम का बदला दस से सात सौ तक दिया जाता है। अल्लाह तआला ने फरमाया मगर रोजा कि वह मेरे लिए है और उसकी जजा मैं दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को मेरी वजह से तर्क करता है रोजादार के लिए दो खुशियां है एक इफ्तार के वक्त और एक अपने रब से मिलने के वक्त और रोजादार के मुंह की बू अल्लाह के नजदीक मुश्क से ज्यादा पाकीजा है और रोजा सिपर (ढाल) है और जब किसी के रोजे का दिन हो तो न बेहूदा बके और न चीखे फिर अगर उससे कोई गाली गलौच करे या लड़ने पर आमादा हो तो कह दे मैं रोजादार हूं।
पैगम्बर साहब ने फरमाया कि अल्लाह के नजदीक आमाल सात किस्म के हैं दो अमल वाजिब करने वाले और दो का बदला उनके बराबर है। और एक अमल का बदला दस गुना और एक अम्ल का मुआवजा सात सौ है और एक वह अमल है जिसका सवाब अल्लाह ही जाने। वह दो जो वाजिब करने वाले है उनमें एक यह कि जो खुदा से इस हाल में मिले कि खालिस उसी की इबादत करता था किसी को उसके साथ शरीक न करता था उसके लिए जन्नत वाजिब। दूसरा यह कि जो खुदा से मिला इस हाल में कि उसने शरीक किया है तो उसके लिए जहन्नम वाजिब और तीसरा यह कि जिसने बुराई की उसी इसी सजा दी जायेगी। चैथा यह कि जिसने बुराई की उसको इसी कद्र अमल न किया तो उसको एक नेकी का बदला दिया जायेगा और पंाचवा यह कि जिसने नेकी की उसे दस गुना सवाब मिलेगा और छटा यह कि जिसने अल्लाह की राह में खर्च किया उसको सात सौ का सवाब मिलेगा एक दरहम का सात सौ दरहम एक दीनार का सवाब उसका सवाब अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता।

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