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आसन शरीर का साधन है। इसका अर्थ है शरीर को ऐसी स्थिति में रखना जिससे निश्चल होकर सुख के साथ देर तक रह सकते हैं। नाना प्रकार के आसन होते हैं- पद्मासन, वीरासन, भद्रासन, सिद्धासन, शीर्षासन, गरुणासन, मयूरासन, शवासन आदि। इनका ज्ञान किसी सिद्ध व्यक्ति से ही प्राप्त करना चाहिए। चित्त की शुद्धि व एकाग्रता के लिए शरीर का अनुशासन भी आवश्यक है। यदि शरीर रोग आदि बाधाओं से मुक्त न हो तो आंतरिक शांति बड़ी कठिन है।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र

Keywords: yoga

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