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प्राणायाम का अर्थ है श्वांस पर नियंत्रण। इस क्रिया के तीन अंग हैं- पूरक (पूरा श्वांस भीतर खींचना), कुंभक (श्वांस को भीतर रोकना), रेचक (नियमित विधि से श्वांस छोडऩा)। श्वांस के व्यायाम से हृदय मजबूत होता है, इसे चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है। योग इस दिशा में और आगे बढ़ता है और एकाग्र साधन के लिए प्राणायाम का निर्देश करता है। क्योंकि प्राणायाम के द्वारा ही शरीर और मन में दृढ़ता आती है। जब तक श्वांस की क्रिया चलती है तब तक चित्त भी उसके साथ चलता है। जब श्वांस वायु की गति स्थगित हो जाती है तब मन भी स्थिर हो जाता है।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र

Keywords: yoga

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