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तीन से पांच सेंकेंड में श्वांस भरें, तीन से पांच सेंकेंड में छोड़ें। कम से कम पांच मिनट, अधिकतम दस से बीस मिनट, असाध्यच रोग होने पर तीस मिनट तक किया जा सकता है।
विधि- दायीं नासिका को दाहिने अंगूठे से बंद करके बायीं नासिका से गहरी श्वांिस अंदर खींचकर बायीं नासिका को बीच की दो अंगुलियों से बंद करके दायीं नासिका से पूरा श्वांंस छोड़ दें। फिर दायीं नासिका से पूरी श्वां स भरकर बायीं से छोड़ें। इस प्रक्रिया को बार बार दोहराएं, तीव्रता से नहीं सहजता से करें।
जब बायीं नासिका से श्वां स भरें तो ऐसा भाव करें कि मेरे अंदर पीड़ा, चंद्र स्वरर से करुणा, प्रेम, वात्संल्य व मातृत्व् आ रहा है। जब दायीं नासिका से श्वां स भरें तो भाव करें कि मेरे अंदर पराक्रम, सकारात्म कता, आनंद, उत्साबह, निर्भयता आ रही है।
लाभ- पूरा स्नाकयु तंत्र, कंप वात, साइनस, आंख, उच्चभ रक्तरचाप आदि के दोष दूर होते हैं।
द्वारा पतंजलि योग समिति गोरखपुर

Keywords: yoga

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