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भगवान शिव का गोवंश के प्रति अगाध लगाव रहा है। लोक कल्याणकारी गो माता की महिमा से भगवान शिव भलीभांति विज्ञ थे। स्कंद पुराण के अनुसार एक बार अपने को एक संकट से त्राण दिलाने के लिए गोलोक जाकर सुरभि गोमाता का स्तवन किया था कि आप सवैदेवमयी सर्वलोकहितैषिणी व सुख-समृद्धि प्रदायिनी हैं। भगवान शिव ने प्रजापति ब्रह्म द्वारा प्रदत्त वृषभ को अपना वाहन बनाया जिसका नाम नंदी पड़ा और अपने ध्वज को वृषभ चिह्न से सुशोभित किया। इसी से उनका नाम वृषध्वज पड़ा। शिव की पूजा व रुद्राभिषेक में गौ दुग्ध का ही महत्व है। अत: हमें श्रावण मास में गोसेवा, गो रक्षा व गो पालन का संकल्प लेना चाहिए। यही भगवान शिव के प्रति सच्ची आराधना-पूजा होगी। इससे गो भक्तों व गो प्रेमियों को भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी।
-वरुण कुमार वर्मा वैरागी, पशु पक्षी सेवाश्रम, नौसढ़

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