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धारणा का अर्थ है चित्त को अभिष्ट विषय पर जमाना। यह बाह्य पदार्थ भी हो सकता है। जैसे सूर्य या अपने धर्म से संबंधित किसी देवता की प्रतिमा और अपना शरीर भी। जैसे अपनी नाभि या भौंहों का मध्य भाग। किसी विषय पर दृढ़तापूर्वक चित्त को एकाग्र करने की शक्ति ही योग की असल कुंजी है। इसी को सिद्ध करने वाला परातीत अवस्था तक पहुंच सकता है।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र

Keywords: yoga

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