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समाधि की अवस्था में मन ध्येय विषय पर इतना लीन हो जाता है कि उसे स्वयं का कुछ भी ध्यान नहीं रहता है। इसका अर्थ है ध्येय विषय में डूबकर अपने को खो देना।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

Keywords: yoga

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