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प्राचीन योग दर्शन में ईश्वर का स्थान बहुत महत्वपूर्ण नहीं दिखता है। स्वयं पतंजलि को जगत की समस्या हल करने के लिए ईश्वर की आवश्यकता नहीं दिखाई पड़ती। उनकी दृष्टि में ईश्वर प्रणिधान की उपयोगिता इसी में है कि चित्त की एकाग्रता या ध्यान के साधनों से उसे जाना जाए। इस दर्शन के परवर्ती लेखक सैद्धांतिक दृष्टि से ईश्वर के स्वरूप की विवेचना करते हैं और ईश्वर के अस्तित्व के लिए प्रमाण व युक्तियां भी देते हैं। मानसिक व शरीरिक स्वास्थ्य के लिए योग आधुनिक दृष्टि से विशेष उपयोगी समझा जा सकता है।
- आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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