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वेतन वृद्धि को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल के चलते गीताप्रेस में पैदा हुए गतिरोध है को लेकर पाठक चिंतित हैं। विभिन्न माध्यमों से वे खुलकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। स्थिति यह है कि पिछले 22 दिन से गीता प्रेस में छपाई कार्य पूरी तरह बंद है। इससे सर्वाधिक लोकप्रिय मासिक पत्रिका कल्याण की छपाई भी रुक गई है। प्रति माह 2.10 लाख प्रतियों वाली पत्रिका 'कल्याणÓ के पाठक सर्वाधिक चिंतित हैं।
सहायक प्रबंधक के साथ अभद्रता करने के आरोप में 8 अगस्त को गीताप्रेस के 12 स्थायी कर्मचारियों को प्रबंधन ने निलंबित कर दिया और 5 अस्थायी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इसके बाद से ही कर्मचारी निलंबित साथियों की बहाली व निकाले गए कर्मचारियों की वापसी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस वजह से गीताप्रेस का काम काज पूरी तरह ठप है। स्टाक में रखी गई पुस्तकें भी डिस्पैच नहीं हो पा रही हैं।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राधेमोहन मिश्र कहते हैं कि गीताप्रेस के नाम से पूरी दुनिया में गोरखपुर जाना जाता है। कल्याण एवं अन्य पुस्तकों का प्रकाशन बाधित होना पाठकों के लिए भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि वे जर्मनी में एक संस्था के डायरेक्टर के पास गए थे, उसे गोरखपुर के बारे में बताने के लिए कई उपाय किए लेकिन वह नहीं समझ पाया, लेकिन उन्होंने जैसे ही गीताप्रेस के बारे में बात की वह उछल पड़ा। उन्होंने कहा कि गीताप्रेस का यह गतिरोध टूटना चाहिए। पाठकों को ध्यान में रखकर कर्मचारियों व प्रबंधन को बैठकर आपसी सहमति बनानी चाहिए।
नेपाल सीमा पर स्थित बढऩी के शिव प्रसाद अग्रहरि कल्याण के नियमित पाठक हैं। उनकी चिंता यह है कि यदि कल्याण नहीं आया तो पूरे महीने पढ़ेंगे क्या। वह बताते हैं कि कल्याण से उन्हें असीम ऊर्जा मिलती है। उन्हें मनुष्य के चरम विकास यात्रा के सूत्र मिलते हैं। उन्होंने कामना की है कि गीताप्रेस का गतिरोध जल्दी खत्म हो।
गोरखपुर के संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष सीताराम जायसवाल भी कल्याण के नियमित पाठक हैं। वह कहते हैं कि चाहे जो हो गीताप्रेस का गतिरोध टूटना चाहिए। इससे सिर्फ गीता प्रेस का ही नहीं बल्कि गोरखपुर को भी नुकसान हो रहा है। साहबगंज के व्यापारी अनूप अग्रहरि ने कहा कि कल्याण पत्रिका के पाठक सिर्फ गोरखपुर नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में हैं। यदि कल्याण उन लोगों तक समय से नहीं पहुंची तो, गीताप्रेस की बंदी की सूचना को वे सही मान लेंगे। इसलिए जरूरी है कि यह गतिरोध टूटे और छपाई शुरू हो।

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