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सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका:। अर्थात रूद्र सर्वदेवात्मक हैं और सभी देवता शिवात्मक हैं। शिव शब्द का अर्थ ही है कल्याणकारी। रूद्र का अर्थ है रुत अर्थात दु:ख को दूर करने वाला, इसलिए शिव व रूद्र दोनों पर्यायवाची शब्द हैं। वेदों में भी भगवान शिव की आराधना की गई है। वेदों में शिव का वेदस्वरूप वर्णन मिलता है। वेद: शिव: शिवो वेद:, अर्थात वेद शिव हैं और शिव वेद हैं। शिव के साथ सर्वदा शक्ति विराजमान रहती हैं। शिव शब्द में जो इकार है वह शक्ति हैं, यदि शिव शब्द से इकार को हटा दिया जाए तो शिव भी शक्ति विहीन होकर शव हो जाएंगे, इसलिए वह सदैव शक्ति को साथ रखते हैं, उनका सम्मान करते हैं, इसीलिए उन्हें साम्बसदाशिव व अद्र्धनारीश्वर आदि नामों से पुकारा जाता है। श्रावण मास का महात्म्य पुराणों में विस्तृत रूप से प्राप्त होता है। इस माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय है। उनकी दयादृष्टि व प्रसन्नता के लिए श्रावण मास में हर श्रद्धालु को उनका अभिषेक करना चाहिए।
-आचार्य जोखन पांडेय शास्त्री, सचिव भारतीय विद्वत समिति, गोरखपुर

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