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वेतन वृद्धि व साथी कर्मचारियों की बहाली व वापसी को लेकर चल रहे कर्मचारियों की हड़ताल के चलते गीताप्रेस में गतिरोध है। मंगलवार को उप श्रमायुक्त के साथ द्विपक्षीय वार्ता में गीताप्रेस के प्रतिनिधि ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि यदि कर्मचारियों का आंदोलन ऐसे ही चलता रहा तो गीताप्रेस को महाराष्ट्र या गुजरात में शिफ्ट करना पड़ेगा। कर्मचारियों ने इसका पुरजोर विरोध किया और कहा- किसी कीमत पर हम गीताप्रेस को यहां से कहीं नहीं जाने देंगे।
गीताप्रेस गोरखपुर की पहचान है। गीताप्रेस केवल धार्मिक व सामाजिक महत्व की सस्ते दर की पुस्तकें ही नहीं उपलब्ध कराता है, बल्कि वहां के कर्मचारी अपने आचरण से सहयोग, सहकार व समरसता का संदेश भी देते हैं। आज उसी गीताप्रेस के कर्मचारी प्रबंध तंत्र के विरोध में हैं, जिसकी वजह से 25 दिन से गीताप्रेस का कामकाज ठप है। न पुस्तकों की छपाई हो रही है और न ही पूर्व में छप चुकी पुस्तकें यहां से डिस्पैच हो पा रही हैं। वेतन वृद्धि की मांग कर रहे कर्मचारी अब वेतन वृद्धि छोड़कर अपने निलंबित साथियों की बहाली व निकाले गए अस्थायी कर्मचारियों की वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसी संबंध में मंगलवार को उप श्रमायुक्त के साथ द्विपक्षीय समझौता वार्ता आयोजित थी। वार्ता के दौरान गीताप्रेस प्रबंधन के अधिकृत प्रतिनिधि एसके माथुर ने यह कहकर चौंका दिया कि यदि हड़ताल ऐसे ही चलती रही तो प्रबंधन को विवश होकर गीताप्रेस को महाराष्ट्र या गुजरात में शिफ्ट करना पड़ेगा। इसके बाद माहौल गरम हो गया। कर्मचारियों ने पुरजोर आपत्ति दर्ज कराई। कर्मचारी नेता रमन कुमार श्रीवास्तव, मुनिवर मिश्रा व रविंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि हमारी लाश पर गीताप्रेस यहां जाएगा। यह हमारी रोजी-रोटी व आस्था से जुड़ा संस्थान है, गोरखपुर की थाती है, हम जान दे देंगे लेकिन गीताप्रेस को अन्यत्र नहीं जाने देंगे। यह तभी संभव है जब गीताप्रेस के सभी कर्मचारियों को निर्मूल कर दिया जाए।

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