0
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी की तिथि उस समय परम पवित्र हो गई जब श्रीकृष्ण के प्राणों की स्वामिनी का अवतरण पवित्र ब्रजभूमि पर गोपराज वृषभानु और गोपरानी कीर्तिदा के घर हुआ। वृषभानु व कीर्तिदा का सौभाग्य ही था कि मनुष्य करोड़ों जन्मों तक जप-तप करके जिनका दर्शन नहीं पा सकते, देवताओं के लिए भी जिनका दर्शन दुर्लभ है, वे श्रीराधिका उनके घर प्रकट हुईं और वृषभानु कुमारी कहलाईं। बरसाने को मिला सदियों के संचित पुण्य का लाभ। यह श्रीराधा का प्रभाव कहें कि इनके जन्म के दिन कुछ समय के लिए महर्षि गर्ग, दुर्वासा, श्रृंगी, करभाजन आदि ऋषिगण बरसाने पधारे। उन्होंने ग्रह-नक्षत्र देखकर वृषभानुजी को बताया- तुम्हारी बालिका ने शुभ घड़ी में जन्म लिया है। आज प्रीति योग है, बालव करण, धनु लग्न और अनुराधा नक्षत्र है। इसका नाम राधा हो। ऐसे उनका नाम राधा पड़ा।
गोलोक स्वामिनी को मानव रूप क्यों लेना पड़ा? इस प्रश्न का उत्तर ब्रह्म्वैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में आई एक कथा से मिलता है। इस कथा के अनुसार गोलोक में एक बार श्रीकृष्ण विरजा देवी के साथ विराजे थे। यह श्रीराधा को ठीक नहीं लगा। वे अपनी सखियों के साथ वहां से जाने लगी जहां श्री कृष्ण विराजमान थे। उन्हें श्रीकृष्ण के गोप श्रीदाम ने रोक दिया। इसपर उन्होंने श्रीदाम को असुर योनि में जाने का श्राप दे दिया। श्रीदाम ने भी राधा को श्राप दे दिया कि आप भी मानवी योनि में जाएं, गोकुल में श्रीहरि के अंश रायाण नामक वैश्य होंगे, उनके साथ आपका छाया रूप रहेगा। भूतल पर मूर्ख लोग आपको रायाण की पत्नी समझेंगे, अत: श्रीहरि से कुछ समय के लिए आपका विछोह होगा। दोनों ने परस्पर श्राप दे दिया लेकिन बाद में उन्हें क्षोभ हुआ। तब परम प्रभु श्रीकृष्ण ने श्रीदाम को सांत्वना देते हुए कहा कि तुम त्रिभुवन विजयी शंखचूड़ नामक असुर होगे और अंत में श्रीशंकर से भिन्न देह होकर मेरे पास लौट आओगे। इसके साथ ही भगवान ने श्रीराधा को प्रेम से हृदय से लगाकर सांत्वना देते हुए कहा कि वाराह कल्प में मैं पृथ्वी पर आऊंगा और ब्रज में जाकर वहां के पवित्र वनों में तुम्हारे साथ विहार करूंगा। फिर मेरे रहते हुए तुम्हें किस बात का भय है। इस प्रकार भगवान के कहे अनुसार शंखचूड़ और राधाजी ने वृषभानु की पुत्री के रूप में फल भोगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि श्रीदाम के श्राप के अनुसार मानवी रूप में श्रीराधा को वृंदावन में रहते हुए भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा जाने का विछोह भी सहना पड़ा।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र

Keywords: hindu

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top