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गीताप्रेस का गतिरोध टूटने का नाम नहीं ले रहा है। स्थायी कर्मचारियों ने 14 सितंबर की रात में प्रबंधन से समझौता कर लिया। 15 सितंबर को पूरे दिन कामकाज हुआ, कर्मचारी काम पर लौट आए। लेकिन गीताप्रेस खुलने के दूसरे दिन ठेका कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। समझौते से असंतुष्ट कुछ स्थायी कर्मचारी भी ठेका कर्मचारियों के साथ आ गए। इससे गीताप्रेस का कामकाज फिर ठप हो गया।
बता दें कि गत 7 सितंबर को कर्मचारी कामकाज ठप कर वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। गत आठ अगस्त को सहायक प्रबंधक के साथ दुव्र्यवहार के आरोप में प्रबंधन ने 12 स्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था और 5 ठेका कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसके बाद कर्मचारियों के आंदोलन की प्राथमिकता बदल गई। अब वे निलंबित कर्मचारियों की बहाली व निकाले गए पांच ठेका कर्मचारियों की वापसी के लिए आंदोलन करने लगे। प्रबंधन ने साफ कर दिया कि ठेका कर्मचारियों को वापस नहीं लेगा। 38 दिन बाद पूरी तरह टूट चुके स्थायी कर्मचारियों ने प्रबंधन ने निलंबन वापसी पर समझौता कर लिया। प्रबंधन ने वेतन वृद्धि पर समयानुसार विचार करने का आश्वासन दिया। लेकिन ठेका कर्मचारियों के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो पाया। इसलिए 16 सितंबर को ठेका कर्मचारियों ने गेट पर धरना दे दिया, समझौते से कुछ असंतुष्ट स्थायी कर्मचारी भी उनके साथ आ गए। यह सूचना पाकर समझौता करने वाले स्थायी कर्मचारी गीताप्रेस आए ही नहीं। काम काज फिर पहले जैसे ही ठप हो गया।

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