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फजाइले आशूरह यानी दसवीं मुहर्रम शम्सी लाइबे्ररी के मौलाना अजहर शम्सी ने बताया कि मुहर्रम महीने की दसवीं तारीख जिसे आशूरह के नाम से याद किया जाता है दुनिया की तारीख में इतनी अजमत व बरकत वाला दिन है कि जिसमें खुदा की कुदरतों और नेमतों की बड़ी-बड़ी निशानियां जाहिर हुई । उसी दिन हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा कुबूल हुई। हजरत इदरीस अलैहिस्सलाम व हजरत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान पर उठाए गये। हजरत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती तुफाने नूह में सलामती के साथ जुदी पहाड़ पर पहुंची उसी दिन हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की विलादत हुई। हजरत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से जिन्दा सलामत बाहर आए। अर्श व कुर्सी, लौह व कलम, आसमान व जमीन, चाॅंद व सूरज, सितारे व जन्नत बनाए गए। हजरत युसूफ गहरे कुंए से निकाले गए। उसी दिन याकूब की अपने बेटे युसूफ से मुलाकात हुई। हजरत दाऊद की लगजिश माफ हुई। उसी दिन हजरत मूसा को फिरऔन से नजात मिली और फिरऔन अपने लश्कर समेत दरिया में गर्क हो गया। उसी दिन आसमान से जमीन पर सब से पहले बारिश हुई। उसी दिन कयामत (प्रलय) आएगी और उसी दिन हजरत इमाम हुसैन और आपके रूफाकाए किराम ने मैदाने करबला में तीन दिन के भूखे प्यासे रह कर इस्लाम की बका व तहफ्फुज के लिए जामे शहादत नोश फरमा कर हक के परचम को सरबुलन्द फरमाया।

 Keywords: islam

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