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शक्ति आराधना की तैयारी में श्रद्धालु जुट गए हैं। मंदिरों की साफ-सफाई और पंडालों का निर्माण अंतिम दौर में है। 13 अक्टूबर (मंगलवार) से शारदीय नवरात्र शुरू होगा। इस दिन सूर्योदय 6.14 बजे व अश्विन शुक्ल प्रतिपदा संपूर्ण दिन व रात्रि पर्यंत है। चित्रा नक्षत्र का मान दिन भर व भोर में 4.19 बजे तक है। यह जानकारी ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय व शरदचंद्र मिश्र ने दी। उन्होंने कलश स्थापन, महाष्टमी व महानवमी तिथियों पर विस्तार से बातचीत की।
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कब करें कलश स्थापन
इस वर्ष प्रतिपदा तिथि में चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग है। इस नक्षत्र व योग में कलश स्थापन का निषेध है। इसलिए अभिजित मुहूर्त (मध्याह्न 11.36 से 12.24 बजे के बीच) कलश स्थापन किया जाएगा। कलश स्थापन के बाद प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना होगी। दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा।
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महानिशा पूजा व अष्टमी व्रत
20 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पूर्वाह्न 9.48 बजे तक है। इसके बाद अष्टमी शुरू हो रही है जो दूसरे दिन 21 अक्टूबर को सुबह 8.21 बजे तक है। रात में 20 अक्टूबर को अष्टमी तिथि मिलने से महानिशा पूजा इसी दिन होगी। महाष्टमी व महानवमी का व्रत 21 अक्टूबर को है, इसी दिन हवन भी होगा। पारण 22 अक्टूबर को होगा।
- शरदचंद्र मिश्र

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