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करवाचौथ व्रत 30 अक्टूबर को परंपरागत रूप से आस्था व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय 6.26 बजे तृतीया तिथि दिन में 12 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग रही है। इस व्रत में चंद्रोदय व्यापिनी तिथि ग्रहण की जाती है। इस दिन शुक्रवार व रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। मित्र नामक औदायिक योग भी है। यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्रगाढ़ प्रेम में और वृद्धि करेगा। यह जानकारी पं. शरदचंद्र मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि रात को चंद्रोदय वेला में शिव-पार्वती, कार्तिकेय व चंद्रमा के पूजन का विधान है।

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