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16 दिसंबर को रात्रि 11 बजकर 47 मिनट पर सूर्य वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 15 जनवरी 2016 को प्रात:काल 7 बजकर 34 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। इसलिए 16 दिसंबर से लेकर 15 जनवरी तक खरमास रहेगा। वर्ष में दो बार खरमास आता है। एक बार जब सूर्य का प्रवेश धनु राशि में और दूसरी बार जब ये मीन राशिगत होते हैं। दोनों बार सूर्य का प्रवेश वृहस्पति के घर में होता है। बहुत से शुद्ध कार्यों के लिए त्रिबल शुद्धि की आवश्यकता होती है। त्रिबल अर्थात सूर्य, चंद्रमा व वृहस्पति का बल। पूर्व आचार्यों के अनुसार खरमास में दो ग्रहों- सूर्य व चंद्रमा का बल बना रहता है परन्तु तीसरे ग्रह वृहस्पति का तेज सूर्य के आने से क्षीण हो जाता है। इसलिए बहुत से महत्वपूर्ण कार्य स्थगित हो जाते हैं। परंतु अन्य शेष ग्रहों के बल के कारण अनेकानेक कार्य किए जा सकते हैं।
निषिद्ध कार्य- विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत, वधू प्रवेश, द्विरागमन, वर वरण, कन्या वरण, वाग्दान, नूतन गृह प्रवेश, गृहारंभ, कर्णवेध, दीक्षा ग्रहण इत्यादि।
सकरणीय कर्म- सर्व वस्तु क्रय-विक्रय, प्रसूति स्नान, नामकरण, अन्नप्राशन, पौधरोपण, आभूषण निर्माण व धारण करना, औषधि निर्माण, नौकरी आरंभ, संपत्ति विभाजन आदि।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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