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सूर्य एक राशि पर एक महीना, चंद्रमा सवा दो दिन, मंगल प्राय: डेढ़ महीना, बुध लगभग एक महीना, गुरु एक वर्ष, शुक्र 28 दिन, शनि ढाई वर्ष, केतु व राहु डेढ़ वर्ष रहते हैं। सूर्य और चंद्रमा को छोड़कर शेष अन्य ग्रह कभी मार्गी और कभी वक्री होते हैं। इसलिए उनके कालावधि में न्यून या अधिकता का योग पाया जाता है। राहु व केतु कभी भी मार्गी नहीं होते। ये दोनों सर्वदा वक्री गति से गमन करते हैं। जातक के जीवन और क्रिया कलापों पर वर्ष में ज्यादा प्रभाव शनि, गुरु व राहु का रहता है। सन 2016 में तला, वृश्चिक और धनु राशि को शनि की साढ़ेसाती का प्रकोप बना रहेगा। इसी तरह मेष और सिंह राशि पर शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा। गुरु सन 2016 में वर्ष के प्रारंभ से 10 अगस्त तक सिंह राशि में और 11 अगस्त को रात्रि 9 बजकर 25 मिनट पर कन्या राशिगत होगा। इसी तरह राहु वर्ष के आरंभ में कन्या राशि पर और 29 जनवरी को रात्रि 1 बजकर 21 मिनट पर सिंह राशि में और केतु ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। ग्रह गोचर के अनुसार वर्ष 2016 का फलादेश निम्नवत होगा।
मेष- वर्ष के आरंभ से 10 अगस्त तक वृहस्पति की शुभ नवम दृष्टि रहने से वर्ष के पूर्वाद्ध भाग में बिगड़े कार्य बनेंगे। आय के साधनों में भी सुधार होगा। व्यवसाय संबंधी कोई नई योजना बनेगी। परन्तु वर्ष भर शनि की ढैया रहने से व्यर्थ की दौड़-धूप व अधिक खर्च होंगे। वर्ष के आरंभ से 19 फरवरी तक मंगल की स्वगृही दृष्टि होने से धन लाभ और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। 20 फरवरी से 15 जून तक मंगल अष्टमस्थ रहने से घरेलू परेशानियों के कारण तनाव व आर्थिक उलझनें बढ़ेंगी।
वृष- वर्ष भर वृष राशि पर शनि की सप्तम मित्र दृष्टि रहेगी। वर्ष के आरंभ से 18 जनवरी तक राशि स्वामी शुक्र की स्वगृही दृष्टि पडऩे से कुछ सुखद एवं मंगलकारी घटनाएं घटित होंगी। उच्च प्रतिष्ठित लोगों व स्त्री के सहयोग से लाभ की संभावनाएं बढ़ेंगी। 19 जनवरी से शुक्र अष्टमस्थ होने से बनते कार्यों में अड़चनें, धनहानि, व्यवस्था में कमी और खर्चोँ की अधिकता होगी। 17 सितंबर तक मंगल की विशेष दृष्टि रहने से मिश्रित प्रभाव रहेगा। धनागम के साधनों में वृद्धि होगी। सुख-साधनों पर अत्यधिक खर्च होंगे। क्रोधाधिक्य, रक्त विकार व ब्लडप्रेसर आदि के कारण मानसिक परेशानियां अधिक रहेंगी।
मिथुन- वर्ष के आरंभ से 13 जनवरी, 8 फरवरी से 1 मार्च तक बुध के अष्टम भाव में संचार करने से स्वास्थ्य संबंधी कष्ट प्राप्त हो सकता है। 14 जनवरी से 7 फरवरी तक बुध की स्वगृही दृष्टि रहने से कुछ मिश्रित प्रभाव रहेगा। 20 फरवरी से 17 जून तक मंगल की विशेष दृष्टि इस राशि पर होने से पराक्रम व पुरुषार्थ में वृद्धि परंतु भागदौड़ अधिक रहेगी। क्रोध-उत्तेजना अधिक रहे। 1 मार्च से 18 मार्च तक बुध के भाग्य भाव में होने से भाग्योन्नति तथा उच्च प्रतिष्ठित लोगों से संपर्क बनेगा। 19 मार्च से 2 अप्रैल तक बुध के नीचस्थ होने से स्वास्थ्य हानि, मानसिक तनाव, बनते कार्य में विघ्न। 2 अप्रैल से 7 जून तक बुध, मेष में होने से लाभ, आय प्राप्ति के अवसर मिलेंगे। 8 से 26 जून तक बुध के 12वें भाव में संचार करने से दीर्घ यात्रा का योग बनेगा। 27 जून से 10 जुलाई तक बुध के मिथुन राशि में होने से अकस्मात धन लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि व बिगड़े कार्यों में सुधार होगा। 19 अगस्त से वर्ष के अंत तक धन प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होंगे।
कर्क- वर्ष के आरंभ से 13 जनवरी तक बुध की तथा 15 जनवरी से 12 फरवरी तक सूर्य की दृष्टि रहने से स्वास्थ्य विकार तथा आय के साधनों में अड़चनें रहेंगी। 9 फरवरी से 1 मार्च तक पुन: बुध की सप्तम दृष्टि रहने से परिवार में व्यर्थ की उलझनें व तनाव बढ़ेगा। 7 से 31 मार्च तक लाभेश और सुखेश शुक्र के अष्टम भावस्थ संचार करने से सोची हुई यातनाओं में विलंब, खर्च अधिक, कार्य व्यवसाय में लाभ कम होगा। 11 जुलाई 26 जुलाई तक बुध का तथा 6 जुलाई से 16 अगस्त तक सूर्य का संचार इस राशि में होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी तथा निकट के भाई-बंधुओं से मनमुटाव व विरोध का योग है। 18 सितंबर से 31 अक्टूबर तक इस राशि पर मंगल की अष्टम दृष्टि पडऩे से स्वभाव में उत्तेजना व मानसिक तनाव बढ़ेगा।
सिंह- वर्ष के आरंभ में 11 अगस्त तक सिंह राशि में गुरु का संचार रहने से पिछले वर्ष के कुछ बिगड़े कार्यों में सुधार होगा। व्यवसाय में लाभ और उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नवीन कार्य की योजनाएं बनेंगी। परन्तु 29 जनवरी से वर्ष के अंत तक राहु का संचार एवं वर्ष भर शनि की ढैया रहने से बनते कार्यों में रुकावटें होंगी। घरेलू परेशानियों के कारण मानसिक तनाव रहेगा। बीच में 13 फरवरी से 13 मार्च तक सूर्य की स्वगृही दृष्टि पडऩे से आय के साधनों में वृद्धि, मान-सम्मान बढ़ेगा। प्रयास करने पर बिगड़ा कार्य बनेगा। 14 मार्च से सूर्य अष्टमस्थ होने से पुन: विघ्न-बाधाएं रहेंगी। 13 अप्रैल से 13 मई तक सूर्य उच्चस्थ संचार करने से इस अवधि में प्रतिष्ठित लोगों से मेलजोल बढ़ेगा। 14 मई से 15 जून तक सूर्य व शनि के मध्य सम सप्तम दृष्टि संबंध रहने से घरेलू तनाव व अशांति रहेगी। 11 अगस्त से गुरु का संचार हटने से लग्नस्थ राहु तथा शनि की दृष्टि का प्रभाव अधिक रहेगा। 1 नवंबर से 11 दिसंबर तक मंगल की अष्टम दृष्टि रहने से गुप्त शत्रु हानि पहुंचाने की चेष्टा करेंगे।
कन्या- वर्ष के आरंभ से 29 जनवरी तक राहु का संचार रहने से बनते हुए कार्यों में विलंब व रुकावटें रहेंगी। बुध पंचम भाव में 13 जनवरी तक रहने से भविष्य के संबंध में दीर्घ योजनाएं बनेंगी। 18 मार्च से 2 अप्रैल तक बुध के नीचस्थ होने से स्वास्थ्य की हानि, आय में कमी और खर्च में वृद्धि संभावित है परन्तु बुध की स्वगृही दृष्टि होने से तथा 14 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य की मित्र दृष्टि होने से निर्वाह योग्य आय के साधन बनेंगे। 2 अप्रैल से 7 जून तक बुध अष्टमस्थ तथा 28 अप्रैल से 22 मई तक वक्री रहने से स्वास्थ्य में विकार, बनते कार्य में विघ्न तथा धनहानि होने के संकेत हैं। 11 अगस्त से इस राशि पर गुरु का संचार होने से बिगड़ी परिस्थितियों में सुधार, धार्मिक कार्यों में समय व्यतीत होगा। नौकरी में पदोन्नति कुछ रुकावटों के बाद होगी।
तुला- शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव वर्ष भर उतरती अवस्था में रहेगा जिससे घरेलू तनाव, कार्य क्षेत्र संबंधी परेशानियां तथा गुप्त चिंताएं बनी रहेंगी। वर्ष के आरंभ से 20 फरवरी तक मंगल का संचार भी इस राशि पर रहने से कार्य क्षेत्र में संघर्ष अधिक रहेगा। यद्यपि परिश्रम और पराक्रम के प्रभाव से गुजारे लायक आय के साधन बनते रहेंगे। निकट वंधुओं से मनमुटाव व तनाव तथा क्रोधाधिक्य रहेगा। 18 सितंबर से 13 अक्टूबर तक शुक्र इसी राशि में संचार करने मान-सम्मान तथा धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे।
वृश्चिक- शनि का संचार एवं साढ़ेसाती का प्रभाव वर्ष भर रहेगा। मंगल वर्ष के आरंभ से 19 फरवरी तक द्वादश भावगत होने से खर्च अधिक, वृथा यात्रा और विपरीत परिस्थितियों के कारण मानसिक तनाव रहेगा। 20 फरवरी से 17 जून तक मंगल इसी राशि में ही संचार करेगा। फलस्वरूप मान-सम्मान में वृद्धि, धन लाभ तथा नई-नई योजनाएं बनेंगी। परन्तु क्रोध और तनाव अधिक रहेगा। 17 अप्रैल से 29 जून तक मंगल वक्री तथा 12वें भाव में संचार करने से पुन: खर्चों में अधिकता, स्वभाव में उत्तेजना अधिक रहेगी। 12 जुलाई से 17 सितंबर तक पुन: मंगल इसी राशि में संचार करेगा। फलत: परिस्थितियां कुछ अनुकूल होंगी। 1 नवंबर 11 दिसंबर तक मंगल उच्चस्थ संचार करने से पराक्रम में वृद्धि, धन प्राप्ति व उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे।
धनु- इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती रहेगी। राशि स्वामी गुरु उच्च राशिस्थ अष्टम में है। उस पर मंगल, बुध तथा शुक्र ग्रहों की दृष्टियां पड़ रही हैं। पूर्वाद्र्ध भाग अत्यंत संघर्ष से युक्त होगा। 14 जुलाई से गुरु भाग्यस्थान में आने से धार्मिक कार्यों की ओर रुचि बढ़ेगी। परन्तु साढ़ेसाती के कारण मानसिक तनाव व खर्च भी बढ़ेंगे। पूरे वर्ष वृहस्पतिवार को विधि पूर्वक व्रत रखना तथा पीला पुखराज धारण करना शुभ रहेगा।
मकर- मकर राशि पर मंगल, बुध व शुक्र ग्रहों का संचार है। उस पर गुरु व शनि दोनों की संयुक्त दृष्टियां पड़ रही हैं जिससे अत्यंत संघर्ष के बाद निर्वाह योग्य आमदनी के साधन बनेंगे। 14 जनवरी से 12 फरवरी तक सूर्य मकर में होने से धर्म-कर्म की ओर रुचि बढ़ेगी। 15 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य तृतीय भाव में होने से शुभ कार्य पर खर्च होगा। 16 जून से 16 सितंबर के बीच मंगल की विशेष दृष्टि रहेगी। 14 जुलाई से वर्ष पर्यंत गुरु अष्टम राशि में संचार करेगा। इसलिए अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना होगा। शनिवार को सरसो के तेल में अपना चेहरा देखकर मंत्र पढ़ते हुए सायंकाल के समय मंदिर में चढ़ाना हितकर रहेगा- ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:।
कुंभ- राशि स्वामी शनि 14 मार्च से 1 अगस्त तक वक्री रहेगा। कार्य व्यवसाय में अत्यंत संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का सामना होगा। परन्तु लग्नेश शनि पर 13 जुलाई तक गुरु की दृष्टि होने से निर्वाह योग्य आय के साधन बनेंगे। उच्च प्रतिष्ठित लोगों के साथ संपर्क बनेगा। शुक्र भाग्य स्थान में होने से वाहन आदि सुख-साधन उपलब्ध होंगे। हर शनिवार को भगवान शिव के मंदिर में कच्ची लस्सी, विल्वपत्र, एक चुटकी शक्कर डालकर ऊं नम: शिवाय पढ़कर अभिषेक करने से लाभ होगा।
मीन- वर्ष भर केतु का संचार एवं 13 जुलाई तक राशि स्वामी गुरु की दृष्टि रहेगी। पूर्वाह्न भाग में उच्च प्रतिष्ठित लोगों के संपर्क रहेगा। 15 जुलाई से मंगल नीच राशि में होने से अकस्मात खर्च बढ़ेंगे और मानसिक तनाव रहेगा। 15 सितंबर से 23 दिसंबर तक भाग्येश मंगल की मित्र दृष्टि पडऩे से बिगड़े कार्यों में सुधार होगा परंतु क्रोधाधिक्य के कारण हानि के योग भी हैं। प्रत्येक गुरुवार को केले के पौधे का पूजन करना और शिव लिंग पर हल्दी मिश्रित जल ऊं नम: शिवाय मंत्र से चढ़ाना शुभ रहेगा।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर रूस्‍तमपुर, गोरखपुर

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