0
तैयारी करते अकीदतमंद
इस्लामी तारीख के माह शाबान की पन्द्रहवीं तारीख को शब-ए-बारात के नाम से जाना जाता है. इस बार यह रात २२ मई को पड़ रही हैं. शब-ए-बरात का अर्थ होता है निजात की रात. इस्लाम धर्म में इस रात को महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता हैं कि इसी रात में साल भर के होने वाले
तमाम काम बांटे जाते है जैसे कौन पैदा होगा, कौन मरेगा, किसे कितनी रोजी
मिलेगी आदि। सारी चीजें इसी रात को तकसीम की जाती है। इस दिन शहर की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते है। खुदा से दुआं मांगते हैं. कब्रिस्तान में जाकर पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ उन्हें पुण्य भेजते हैं. वलियों की दरगाह पर जियारत के लिए जाते हैं. पूर्वजों के नाम से गरीबों को खाना खिलाया जाता है. इस दिन घरों में तमाम तरह का हलुआ (सूजी, चने की दाल आदि) व लजीज व्यंजन पकाया जाता है. देर रात तक लोग नफील
नमाज व तिलावत-ए-कुरआन पाक कर अपना मुकद्दर संवारने की दुआ मांगते हैं. अगले दिन रोजा रखकर इबादत करते हैं. इस रात के ठीक पन्द्रह दिन बाद पवित्र रमजान माह आता है. एक तरह से रमजान के रोजों की तैयारी भी हो जाती है.

शब-ए-बरात धार्मिक ग्रंथों की नजर में

मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया के सहायक अध्यापक मोहम्मद आजम ने किताबों के हवाले से बताया कि पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहौ अलैही वसल्लम ने शाबान को अपना महीना करार दिया हैं. इसकी खास विशेषताएं हैं.
शबान में अल्लाह तआला अपने बंदों को खैर व बरकत से ज्यादा नवाजता हैं. बंदों को भी लाजिम है कि वह कसरत से इबादत करें।
हजरत आयशा रजि. फरमाती है पैगम्बर मोहम्मद साहब इस माह ज्यादा रोजा रखा करते थे. इस महीनें में गुनाहों की माफी होती है. रब फरमाता है कि हमारे हुक्म से इस रात में हर हिक्मत वाला काम बांट
दिया जाता है और उस काम के फरिश्तों को उन्हें पुरा करने पर लगा दिया जाता है. इस रात में साल का हर पैदा होने वाला और हर मरने वाला
आदमी लिखा जाता है.
रब शब-ए-बरात में तमाम
उम्मत पर बनी कल्ब की बकरियों के बालों के बराबर रहमतें नाजिल फरमाता है (बनी कल्ब अरब में एक कबीला था, उन के यहां बकरियां बहुत ज्यादा थी)
जो शख्स इस रात में सौ रकात नफील नमाज पढ़ेगा रब उसे के पास सौ फरिश्तें भेजेगा.तीस जन्नत की खुशखबरी सुनायेंगे. तीस दोजख के अजाब से दूर रखेंगे.तीस दुनिया की परेशानियों से दूर रखेंगे. दस शैतान की मक्कारियों से बचायेंगे. हजरत अली से रिवायत है कि हुजूर ने फरमाया शब-ए-बरात आये तो रात में नमाज पढ़ों और दिन में रोजा रखों. हुजूर ने फरमाया कि अल्लाह इस रात सूरज डूबते समय आसमान से दुनिया की तरफ खास तवज्जो करता है और फरमाता है कि क्या है कोई मोक्ष चाहने वाला कि मैं उसे मोक्ष प्रदान करूं. क्या है कोई रोजी मांगने वाल कि मैं
उस को रोजी दूं, क्या है कोई गिरफ्तारें बला कि मैं उसे राहत दूं, इस किस्म की आवाज सुबह तक आती रहती हैं.

यह करना चाहिए

इस मुबारक रात में गुस्ल करना, अच्छे कपड़े पहनना वास्ते इबादत के, सुरमा लगाना, मिस्वाक करना, इत्र लगाना, कब्रों व वलियों के मजारों की जियारत करना, फातिहा दिलाना, खैरात करना, मुर्दों के मोक्ष की दुआ करना, बीमार का हाल चाल जानना, तहज्जुद की नमाज पढ़ना, नफील नमाजें ज्यादा पढ़ना, दरूद व सलाम की
कसरत करना, सूरः यासीन शरीफ की तिलावत करना, नेक काम ज्यादा करना, इबादत में सुस्ती न करना बेहतर है.

यह नहीं करना चाहिए

इस मुबारक रात की कद्र न करना, इबादत में सुस्ती व काहिली करना, सिनेमा
देखना, चाय खानों में रात गुजार देना, आतिशबाजी खुद जलाना या बच्चों को
इसकी आदत डालना, रात फिजूल काम और गपशप में गुजार देना, बुरे काम करना, लोगों को सताना, गीबत और चुगली में वक्त बर्बाद करना, रात तमाम सोते रहना वगैरह ये तमाम बातें खुदा और उसके रसूल को नाराज करती हैं. इससे सख्ती से बचना चाहिए.

नवाफिल शब-ए- बरात
1. मगिरब की नमाज के बाद गुस्ल करके दो रकात नमाज तहियतुल वुजू पढ़े इसके
बाद आठ रकात नमाज नफिल चार सलाम से अदा करें. हर रकअत में बाद अलहम्द के सूरः इख्लास पांच बार पढ़े तो गुनाहों से पाक होगा. दुआयें कुबूल होंगी और सवाबे अजीम हासिल होगा.
2. चार रकात नफील एक सलाम से पढ़े. हर रकात में बाद अलहम्द के सूर इख्लास पचास बार पढ़े तो इस तरह गुनाहों से हो जायेगा आयेगा कि जैसे मां के पेट से अभी
पैदा हुआ हों.
3. दो रकात नमाज पढ़ें. हर रकात में बाद अलहम्द के आयतल कुर्सी एक बार और सूर इख्लास पन्द्रह बार, बाद सलाम के दरूद शरीफ एक सौ बार पढे तो रिज्क
में तरक्की होगी. गम निजात मिलेगी. गुनाहों की माफी होगी.
4. चौदह रकात नमाज नफील सात सलाम सेअदा करे. हर रकात में बाद अलहम्द के
जो सूर चाहे पढ़े. नमाज के बाद एक सौ मर्तबा दरूद शरीफ पढ़ कर जो भी दुआ मांगे कुबूल होगी.
5. दस्तूर है कि इस रात को सलातुल तस्बीह कसरत से अदा करते हैं लोग. रसूल-ए-खुदा ने ये नमाज अपने चचा हजरत अब्बास को सिखायी थी और फरमाया था कि ऐ चचा! इस नमाज के पढ़ने से अगले पिछले तमाम
गुनाह बख्श दिये जाते है. इस रात में तीन मर्तबा सूर यासीन की तिलावत
करनी चाहिए.

मुबारक दिन
इस रात के बाद दिन का रोजा रखना अफजल है.
--------------------
कब्रिस्तानों की साफ-सफाई जोरों पर
गोरखपुर। शब-ए-बरात के मौके पर महानगर की तमाम मस्जिदों, मजारों,
कब्रिस्तानों की साफ-सफाई की जा रही है। मस्जिदों व कब्रिस्तान का
रंग-रोगन किया जा रहा है। लाईटें लगायी जा रही। लोग अपने पूर्वजों की कब्रों के आस-पास साफ-सफाई कर रहें हैं ताकि जियारत के समय किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हों. ऐसी मान्यता है कि शब-ए-बरात के दिन तमाम मुर्दों की रूह को अल्लाह आजाद कर देता है. वह रूह अपने घर पर आती है. रूहों के सुकुन के लिए कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी की जाती है. शब-ए-बरात के दिन पूरी रात इबादत की जाती है. अल्लाह अपने बंदों की तमाम जायज मांगों को
पूरा करता है.नार्मल तिराहे पर मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान की साफ सफाई का काम चल रहा है. इसके अलावा कच्ची बाग, बाले के मैदान के पास स्थित कब्रिस्तान, गोरखनाथ, रसूलपुर स्थित कब्रिस्तानों समेत शहर के छोटे-बड़े कब्रिस्तानों, दरगाहों, मस्जिदों वगैरह में साफ-सफाई, रंगरोहन के काम में तेजी आ गयी है .
बुजुर्गों की मजार व कब्रिस्तीनों को छोटी-छोटी लीइटों से सजाया जा रहा है. नगर
निगम ने महानगर की तमाम मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों के आस-पास साफ सफाई के लिए कर्मियों की जिम्मेदारी तय कर दी हैं . चूना छिड़काव, पथ प्रकाश और पानी की व्यवस्था की तैयारी चल
रही है.

Keywords: islam, shab e barat

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top