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इस वर्ष 4 जुलाई दिन सोमवार को सूर्योदय 5 बजकर 14 मिनट और अमावस्या तिथि का मान सायंकाल 4 बजकर 31 मिनट तक है। इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है। सोमवार से युक्त अमावस्या‍ को सोमवती अमावस्या कहते हैं। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि यदि सूर्योदय के पश्चात 48 मिनट ही अमावस्या मिल जाए तो भी वह व्रतार्चन के लिए बहुत ही पुण्यप्रद है। यद्यपि अमावस्या को सभी तिथियों में एक विशेष पर्व माना जाता है परंतु सोमवार की अमावस्या का और भी विशिष्ट महत्व है। यह स्नान, दान, अर्चन का पर्व है। ब्रह्मवैवर्त पुराण का कथन है कि सोमवती अमावस्या का स्नान, दान, अर्चन सभी पापों का नाश करता है। इस दिन स्ना्न, दान, अर्चन से संतान को सुख तथा अक्षय धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। स्त्रियों को वैधव्य नहीं होता और चिरकाल तक सौभाग्य मिलता है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। अमावस्या् पितरों की तिथि है और चंद्रलोक उनका निवास स्थान। इसलिए अमावस्‍या व चंद्रवार यानी सोमवार का योग पुण्यंकाल है।
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क्या करें
इस दिन पीपल व भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद उनकी 108 प्रदक्षिणा करनी चाहिए। व्रती स्नानादि से निवृत्त होकर मौन रहकर रेशमी या पीला वस्त्र धारण कर पुण्य् कार्य करने का संकल्प लें। इसके बाद अपने हृदय में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए पीपल वृक्ष के पास हाथ जोड़कर ‘ऊं विष्णवे नम:’ मंत्र से पूजा करे। इसके बाद ‘अश्वत्थ हुतभुग्वास गोविंदस्य सदा प्रिय। अशेष हर मे पापं वृक्षराज नमोस्तुते।’ मंत्र से पूजा करे। तत्पश्चापत ‘ऊं सोमवाराय नम:’, ‘सोमायै नम:’, मंत्र से पंचोपचार पूजा करे। पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करे। प्रत्येक परिक्रमा में कुछ न कुछ चढ़ाए और हर बार कच्चा धागा लपेटता जाए। इसके बाद चढ़ाई गई सभी वस्तुएं योग्य ब्राह्मण को दान कर दे। 108 बार की परिक्रमा में सभी देवताओं का समावेश हो जाता है। स्त्रियां इस दिन तुलसी व पार्वती जी को सिंदूर चढ़ाकर अखंड सौभाग्यम की कामना करती हैं।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी, रूस्तमपुर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। मोबाइल- 09451189815


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