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दीपावली अपने आप में कई पर्व का समुच्चय है। इसका केंद्रीय पर्व दीपावली है, जो कार्तिक की अमावस्या को मनाई जाती है, लेकिन इसकी शुरुआत दो दिन पूर्व धन त्रयोदशी यानी धनतेरस के दिन ही हो जाती है। दीपावली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी और दीपावली के दूसरे-तीसरे दिन गोवर्धन पूजा व भैया दूज मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं.शरदचंद्र मिश्र के अनुसार 28 अक्टूबर को धनतेरस, 29 को नरक चतुर्दशी, 30 को दीपावली, 31 को गोवर्धन पूजा व 1 नवंबर को भैया दूज मनाया जाएगा।
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धनतेरस कल
28 अक्टूबर (शुक्रवार) को सूर्योदय 6 बजकर 25 मिनट और त्रयोदशी तिथि का मान सायं 6 बजकर 17 मिनट तक है। इसके बाद चतुर्दशी लग रही है। इस दिन आरोग्य के देवता धनवंतरि की जयंती, भगवान कुबेर का पूजन करने के साथ ही बर्तन, आभूषण आदि नवीन वस्तुओं की खरीदारी की जाती है तथा सायं दीपदान किया जाता है।
खरीदारी का मुहूर्त
- प्रात: 6.25 से 7.49 बजे तक- चर बेला। फल- सामान्य।
- प्रात: 7.49 से पूर्वाह्न 9.13 बजे तक लाभ बेला। फल- उत्तम।
- पूर्वाह्न 9.13 से 10.37 बजे तक अमृत बेला। फल- विशेष लाभकारी।
-दिन में 12 से 1.24 बजे तक शुभ बेला। फल- शुभ फलदायक।
-दिन में 2.48 से 4.12 बजे तक उद्वेग बेला। फल- सामान्य।
-सायं 4.12 से 5.36 बजे तक चर बेला। फल सामान्य।
-सायं 5.35 से 6.17 बजे तक लाभ बेला। फल- उत्तम।
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नरक चतुर्दशी 29 को
29 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी है, इसे रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय 6.25 बजे और चतुर्दशी तिथि का मान सायं 7.52 बजे तक है। इस दिन हनुमानजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है तथा यम के लिए दीपदान किया जाता है।
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दीपावली 30 को
दीपावली 30 अक्टूबर (रविवार) को धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय 6.26 बजे और अमावस्या प्रात:काल से लेकर रात 9.44 बजे तक है। चित्रा नक्षत्र 9 बजकर 2 मिनट तक है, इसके बाद स्वाती नक्षत्र है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। सूर्य ओज, तेज, कांति व विकास का कारक ग्रह है, इसलिए रविवार को दीपावली का होना पूर्णत: शुभ फलदायी रहेगा। मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल, निशीथ काल व महानिशीथ काल उत्तम माना जाता है।
-प्रदोष काल - 30 अक्टूबर को गोरखपुर एवं निकटवर्ती नगरों में सूर्यास्त 5.34 बजे है। सूर्यास्त से लेकर रात 8.09 बजे तक प्रदोष काल है।
-निशीथ काल- रात 8.09 बजे से 10.44 बजे तक निशीथ काल रहेगा।
-महानिशीथ काल- रात 10.44 बजे से 1.18 बजे तक महानिशीथ काल होगा।
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गोवर्धन पूजा 31 को
गोवर्धन पूजा 31 अक्टूबर को है। इस दिन सूर्योदय 6.06 बजे और प्रतिपदा तिथि रात 11.50 बजे तक है। इस दिन स्वाती नक्षत्र व आयुष्मान नामक उत्तम योग है।
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भैया दूज 1 नवंबर को
पहली नवंबर को भातृ द्वितीया यानी भैया दूज पर्व है। इस दिन सूर्योदय 6.28 बजे और द्वितीया तिथि का मान रात 1.57 बजे तक है। इस दिन सौभाग्य नामक योग बन रहा है।

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  1. दिवाली की बहुत अच्छी जानकारी ..

    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!

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