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करवा चौथ व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को तब किया जाता है जब चंद्रोदय के समय भी चतुर्थी हो। 19 अक्टूबर को सूर्योदय 6 बजकर 19 मिनट और चतुर्थी तिथि का मान रात 12 बजकर 49 मिनट तक है। इस दिन चंद्रोदय रात में 8 बजकर 27 मिनट पर है। इसलिए यही दिन इस व्रत के लिए पूर्ण मान्य दिन है। दिन भर निर्जल और निराहार रहकर रात्रि में चंद्रोदय के समय अघ्र्य देकर व्रत समाप्त किया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति के मंगल व समृद्धि के लिए रहती हैं।
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कैसे करें व्रत व पूजा
एक पीढ़ा (लकड़ी का पाटा) पर जल से भरा एक पात्र रखें। उस जल में चंदन और पुष्प छोड़ें और मिट्टी का एक करुआ लेकर उसमें गेहूं और उसके ढकनी में चीनी भर लें और एक रुपया नगद रख दें। करुए पर स्वास्तिक बनाकर तेरह बिंदी दें और हाथ में गेहूं के तेरह दाने लेकर कथा सुने। तत्पश्चात करुए पर हाथ रखकर उसे किसी वृद्ध महिला का चरण स्पर्श कर अर्पित करें और चंद्रोदय के समय रखे जल से अघ्र्य देकर अपना व्रत तोड़ें। कुछ स्त्रियां दीवार या कागज पर चावल को जल में पीसकर करवाचौथ का चित्र बनाती हैं और उसमें चंद्रमा और गणेश की प्रतिमा उकेरती हैं तथा चावल, गुड़ व रोली से पूजा करती हैं। इस दिन स्त्रियां भजन व मांगलिक एवं सात्विक कर्मों में व्यतीत करें और सुंदर वस्त्र तथा आभूषण श्रृंगार करके करवा की पूजा करें।
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पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार जब पांडवों पर घोर विपत्ति का समय आया तब द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का आवाहन किया। कृष्ण ने कहा कि यदि तुम भगवान शिव के बताए हुए व्रत करवाचौथ को आस्था व विश्वास के साथ संपन्न करो तो समस्त कष्टों से मुक्त हो जाओगी और समृद्धि स्वत: ही प्राप्त हो जाएगी। परंतु ध्यान रखना कि व्रत के दौरान भोजन-पानी वर्जित है। द्रोपदी ने व्रत रखा और पांडवों का कष्ट दूर हुआ तथा उन्हें पुन: राज्य की प्राप्ति हुई।
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एक अन्य कथा
एक बार इस व्रत को एक ब्राह्मण की पत्नी ने किया परंतु चंद्र दर्शन के पूर्व ही अघ्र्य दिए बिना उसने भोजन कर लिया। ऐसा करने से उसका व्रत खंडित हो गया, वह विलाप करने लगी। उसी समय मां पार्वती भ्रमण पर जा रही थीं। उसका रूदन सुनकर उस महिला के पास गईं और रूदन का कारण पूछा। महिला ने सही बात बता दी। मां पार्वती सही बात कहने से प्रसन्न हुईं और कहीं कि चंद्रदेव का दर्शन कर विधिपूर्वक अघ्र्य दो, पूजन करो और प्रायश्चित करो। ऐसा करने के बाद उसका सुहाग पुन: प्राप्त हो गया।
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लोक कथा
एक वृद्ध महिला ने करवा चौथ के दिन गणेश जी की पूजा की। गणेश जी ने उससे वरदान मांगने को कहा। महिला ने अपने परिवार जनों से पूछकर वरदान मांगा कि हे भगवान मुझे भाग्यवान बना दो। गणेशजी ने उससे कहा कि तुमने एक ही साथ सब कुछ मांग लिया। तुम्हारी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होगीं। कहा कि जो भी करवाचौथ व्रत के दिन श्रद्धापूर्वक वरदान मांगता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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कैसे करें उद्यापन
एक थाली में तेरह जगह चार-चार पूड़ी और हलवा रख लें। उसके ऊपर चारो ओर रोली-चावल से हाथ फेरकर उसे तेरह सुहागिनों को दान दें। उसके पश्चात 13 सुहागिनों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर, उन्हें बिंदी लगाकर विदा करें।
-आचार्य शरद चंद्र मिश्र, 430 बी, आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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