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गोरखपुर : इमामबाड़ा इस्टेट मियां बाजार के सज्जादानशीन अदनान फर्रूख शाह (मियां साहब) का पहला गश्ती जुलूस मुहर्रम की तीसरी (बुधवार) को मातमी धुनों के बीच निकला। बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए। मियां साहब ने 31 स्थानों पर खड़ा होकर मातम किया। जुलूस में दो बल्लम, इस्लामी परचम व 20 सोने-चांदी के पंजे (सद्दा) लिए अकीदतमंद शामिल थे। ढोल-ताशे व झांझ बज रहे थे।
सायं 7 बजे घंटा बजने के बाद मियां साहब पारंपरिक पोशाक (सफेद पैरहन) में अपने कक्ष से बाहर निकले और मर्सियाखाने में गए। उनके आगे दो मशालधारक व अगल-बगल आठ निजी अंगरक्षक सफेद वर्दी में बल्लम लिए चल रहे थे। मियां साहब ने वहां फातिहा पढ़ी। इसके बाद अकीदतमंदों के साथ नौगोल होते हुए पश्चिमी फाटक से निकले और इमामबाड़ा के इमाम चौक पर फातिहा पढ़ी। फिर मातम करते हुए उत्तर फाटक से इमामबाड़ा में दाखिल हुए और घुनघुन की ताजिया के पास फातिहा पढ़ी। फातिहा के दौरान ढोल-ताशे व झांझ बजने बंद हो जाते थे। वहां से वह ईदगाह होते हुए उसी नौगोल से अंदर गए और पुन: मर्सियाखाने में फातिहा पढ़ी। इसके बाद मशालधारक व उनके निजी अंगरक्षक उन्हें उनके कक्ष तक ले गए। वहां प्रसाद वितरण किया गया।
जुलूस में मियां साहब के पुत्र आतिफ अली शाह व अयान अली शाह, जुल्फेकार अहमद, मंजूर आलम, ख्वाजा शम्सुद्दीन अहमद, अजहद अहमद, हाजी अमीरूद्दीन, फैजी बाबा, इरशाद अहमद व आवेद खां सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल थे।

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