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वैज्ञानिक युग में भूत-प्रेत को अब नई पीढ़ी मानती नहीं है। टोना-टोटका आदि भी उनकी समझ से परे है। लेकिन हमारे पूर्वजों ने कुछ तो इसमें सत्यता देखी होगी। इनका प्रभाव देखा होगा, इसीलिए इनके उपाय भी तलाशे हैं। क्योंकि जब तक समस्या नहीं आती है, तब तक समाधान की खोज भी नहीं होती है। गांवों में आज भी सोखा-ओझा होते हैं और भूत-प्रेत का इलाज करते हैं। यह ऐसा इलाज है जो किसी चिकित्सा पद्धति में नहीं हो पाता है, हार मानकर लोग इसके विशेषज्ञों के पास जाते हैं और मुक्ति पाते हैं। उदाहरण के लिए बताता हूं, एक सरदार जी अपनी पत्नी के साथ मेडिकल कालेज में एक मरीज को देखने गए थे। वहां से लौटने पर उनकी पत्नी की तबीयत अचानक खराब हो गई। तत्काल लेकर हास्पीेटल गए तो पता चला कि फेफड़ा लास्ट स्टेज में है। ऐसा संभव नहीं है कि फेफड़ा लास्ट स्टेज में पहुंचने के बाद पता चले। किसी की सलाह पर वह पास की एक मजार पर गए और वहां रहने वाले एक व्यक्ति ने मात्र अगरबत्तीप-कपूर जलाकर उन्हें ठीक कर दिया। इस तरह की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। इस पोस्ट के जरिये आपको भूत-प्रेत भगाने के कुछ प्रयोग बताने जा रहे हैं, शायद आपके किसी काम आ जाए।
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भूत-प्रेत भगाने के प्रयोग
ज्यादातर भूत-प्रेत लहसुन की गंध बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसलिए जिन्हें भूत-प्रेत पकड़ा हो, उनके गले में लहसुन की कलियों की माला पहना दें। भूत-प्रेत छोड़कर भाग जाएंगे। इसके अलावा जब वह व्यक्ति सोए तो उसके सिरहाने लहसुन व हींग को पीसकर उसकी गोली बनाकर रख दें।
-घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें और पीडि़त व्यक्ति को भी स्वच्छ रखें तथा उसे साफ कपड़े पहनाएं।
-जिसे भूत-प्रेत पकड़ा है उसके ऊपर बूंदी का लड़़डू उतारकर चौराहा या पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। ऐसा तीन दिन लगातार करें जिसमें रविवार न हो।
-रक्षा कवच या यंत्र धारण कराने से भी भूत-प्रेत भाग जाते हैं, रक्षा कवच या यंत्र किसी योग्य व्यक्ति से बनवाना चाहिए। साथ ही पीडि़त को गंगाजल प्रतिदिन पिलाएं। संभव हो तो नवार्ण मंत्र (ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का एक माला जप कर गंगाजल को अभिमंत्रित कर लें।
-मंगलवार व शनिवार को हनुमानजी का दर्शन करें और उन्हें सिंदूर अर्पित करें। वह सिंदूर लेकर अपने माथे पर लगाएं।
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भूत-प्रेत से पीडि़त व्यक्ति की पहचान
भूत-प्रेत से पीडि़त व्य़क्ति चिड़चिड़ा हो जाता है और उसके शरीर व कपड़ों से विशेष तरह की गंध आती है। आंखें लाल हो जाती हैं, चेहरा भी लाल हो जाता है। अनायास पसीना बहुत होता है। सिर व पेट में दर्द की शिकायत हो सकती है। कभी-कभी वह झुककर या बच्चों की तरह बकइयां चलने लगता है, अजीब सी हरकतें करता है।

ज्याेतिषाचार्य पं: नरेंद्र उपाध्याय

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