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पंचब्रह्मरूप हैं भगवान शिव पंचब्रह्मरूप हैं भगवान शिव

समस्त लोक के एकमात्र संहारक, रक्षक व समग्र जगत के एक मात्र स्रष्टा पंचब्रह्मरूप शिव ही हैं। यही पंचब्रह्म नामक पांच श्रेष्ठ मूर्तियां संसार ...

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शिव कृपा पर ही निर्भर है सबकुछ शिव कृपा पर ही निर्भर है सबकुछ

शिव क्या हैं? इसको जान लेना शिव कृपा पर ही अवलंबित है। वस्तुत: इसे जानना ही शिव का साक्षात्कार कर लेना है, जो बहुत दूर की बात है। फिर भी साध...

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शिव को अत्यंत प्रिय है बिल्व पत्र शिव को अत्यंत प्रिय है बिल्व पत्र

भगवान शिव को बिल्व पत्र (बेल पत्र) अत्यंत प्रिय है। सिर्फ बिल्व पत्र चढ़ाने से ही शिवजी पूर्ण पूजन का फल साधक को दे देते हैं। वृहद धर्मपुराण...

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दो सितंबर को धूमधाम से मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो सितंबर को धूमधाम से मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

गृहस्थ जन दो सितंबर और वैष्णव जन तीन सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाएंगे। जलकल बिल्डिंग व पुलिस लाइन में भगवान श्रीकृष्ण की लील...

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प्रकाश व गति के स्वरूप हैं शिव प्रकाश व गति के स्वरूप हैं शिव

करोड़ों वर्ष पूर्व ब्रह्मांड में हुए धमाके से ग्रहों का निर्माण हुआ। ऋषि-मुनियों ने उसे नाद कहा, ऐसा नाद जिसका न आदि है और न अंत, यह प्रकाश ...

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सर्वत्र विद्यमान हैं शिव सर्वत्र विद्यमान हैं शिव

पुराणों में शिव के बारह प्रकार के भिन्न सूर्यात्मक रूप की चर्चा मिलती है। कहा गया है कि आदित्यरूप भगवान शिव की अमृता नामक कला प्राणियों को ज...

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शिव को सर्वाधिक प्रिय है सावन शिव को सर्वाधिक प्रिय है सावन

शिव शब्द कल्याण का पर्याय है। भगवान शिव को सावन सर्वाधिक प्रिय है। सावन में कर्क राशि का सूर्य होता है। कर्क राशि जल राशि है। अतएव शिव को जल...

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