1
वर्तमान ज्योतिष में आधारहीन सिद्धान्त वर्तमान ज्योतिष में आधारहीन सिद्धान्त

लेखक- आचार्य पवन त्रिपाठी ज्योतिष में कुछ कुरीतियां हैं जैसे- कालसर्प योग, साढ़ेसाती तथा मांगलिक दोष आदि। हमारे ज्योतिषी कलसर्प दोष से जनता ...

Read more »

1
मंदिर के गुंबद का रहस्य मंदिर के गुंबद का रहस्य

मेरी पुकार मुझ तक लौट के आ जाए, इसलिए मंदिर का गुंबद निर्मित किया गया जैसे कि इस मुल्क में मंदिर बने। और कोई तीन चार तरह के मंदिर खास तरह क...

Read more »

0
गुरुनानक गुरुनानक

नानक ने परमात्मा को गा-गा कर पाया। गीतों से पटा है मार्ग नानक का। इसलिए नानक की खोज बड़ी भिन्न है। पहली बात समझ लेनी जरूरी है कि नानक ने योग...

Read more »

0
मीरा मीरा

मीरा की इस झील में तुम्हें निमंत्रण देता हूं। मीरा नाव बन सकती है। मीरा के शब्द तुम्हें डूबने से बचा सकते हैं। उनके सहारे पर उस पार जा सकते ...

Read more »

0
महावीर महावीर

महावीर एक दार्शनिक की भांति नहीं हैं, एक सिद्ध, एक महायोगी हैं। दार्शनिक तो बैठ कर विचार करता है जीवन के संबंध में, योगी जीता है जीवन को। दा...

Read more »

0
लाओत्से लाओत्से

लाओत्से को बहुत कम लोग जानते हैं। जितना ऊंचा हो शिखर, उतनी ही कम आंखें उस तक पहुंच पाती हैं। जितनी हो गइराई, उतने ही कम डुबकीखोर उस गहराई तक...

Read more »

0
कृष्ण कृष्ण

कृष्ण का व्यक्तित्व बहुत अनूठा है। अनूठेपन की पहली बात तो यह है कि कृष्ण हुए तो अतीत में, लेकिन हैं भविष्य के। मनुष्य अभी भी इस योग्य नहीं ह...

Read more »

0
कबीर कबीर

कबीर अनूठे हैं। और प्रत्येक के लिए उनके द्वारा आशा का द्वार खुलता है। क्योंकि कबीर से ज्यादा साधारण आदमी खोजना कठिन है। और अगर कबीर पहुंच सक...

Read more »

1
गोरख गोरख

गोरख से इस देश में एक नया ही सूत्रपात हुआ, महावीर से कोई नया सूत्रपात नहीं हुआ। वे अपूर्व पुरुष हैं; मगर जो सदियों से कहा गया था, उनके पहले ...

Read more »

0
गौतम बुद्ध गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध ऐसे हैं जैसे हिमाच्छादित हिमालय। पर्वत तो और भी हैं, हिमाच्छादित पर्वत और भी हैं, पर हिमालय अतुलनीय है। उसकी कोई उपमा नहीं है। हि...

Read more »

1
वेलिंगटन में जमीन में खुदाई के दौरान मिली शिरडी के सांई बाबा की प्रतिमा वेलिंगटन में जमीन में खुदाई के दौरान मिली शिरडी के सांई बाबा की प्रतिमा

शिरडी के सांई बाबा की भक्ति की धूम इन दिनों न्यूजीलैंड में भी मची हुई है। वहां भी भक्तु शिरडी सांई बाबा के भव्य मंदिर के निर्माण की तैयारी ...

Read more »

0
जाही विधि राखे राम वाही विधि रहिए जाही विधि राखे राम वाही विधि रहिए

लेखक- सुशील कुमार, डीआईजी आईटीबी, शिलांग जाही विधि राखे राम वाही विधि रहिए, सीताराम, सीताराम सीताराम कहिए। यह संकेत है सर्व स्वीहकार भाव का...

Read more »

0
पितरों की परम पुनीत तिथि है सर्वपितृ अमावस्या पितरों की परम पुनीत तिथि है सर्वपितृ अमावस्या

जो लोग पितृ पक्ष के पंद्रह दिनों तक श्राद्ध-तर्पण आदि नहीं कर पाते तथा जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो, उन सबके निमित्त श्राद्ध-तर्पण-दान...

Read more »

0
पितरों की प्रसन्नता देती है सुख-समृद्धि पितरों की प्रसन्नता देती है सुख-समृद्धि

पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने का पक्ष पितृ पक्ष 29 सितम्बर से शुरू हो रहा है। पितृ विसर्जन 15 अक्टूबर को होगा। इस 17 दिन के पक्ष में पित...

Read more »

0
श्राद्ध के 96 अवसर बताता है भविष्य पुराण श्राद्ध के 96 अवसर बताता है भविष्य पुराण

पितृपक्ष पितरों के लिए खास समय है। इस पक्ष में विधि-विधान से श्राद्ध करके पितरों को संतुष्ट किया जाता है। हालांकि भविष्य पुराण श्राद्ध के 96...

Read more »

0
पितरों को श्रद्धा दो वे शक्ति देंगे पितरों को श्रद्धा दो वे शक्ति देंगे

पितृपक्ष 1 अक्टूबर से लेकर 15 अक्टूबर तक है। परन्तु 1 अक्टूबर को मध्याह्न में प्रतिपदा न होने से प्रतिपदा का श्राद्ध 30 सितम्बर को किया जाएग...

Read more »

0
पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से वर्ष भर प्रसन्न रहते हैं पितृगण पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से वर्ष भर प्रसन्न रहते हैं पितृगण

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष के नाम से जाता है। इन दिनों पितरों को जलपान कराना चाहिए और मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए। वर्ष के क...

Read more »

0
श्राद्ध की तिथियां श्राद्ध की तिथियां

पूर्णिमा का श्राद्ध- 29 सितम्बर प्रतिपदा का श्राद्ध- 30 सितम्बर द्वितीया का श्राद्ध- 1 अक्टूबर तृतीया का श्राद्ध- 2 अक्टूबर चतुर्थी का श...

Read more »

0
ध्यान क्यों? ध्यान क्यों?

ओशो कहते हैं कि आज का मनुष्य जितना अशांत है उतना शायद पहले कभी नहीं था। इसलिए आज मनुष्य को ध्यान की जितनी आवश्यकता है उतनी पहले कभी नहीं थी।...

Read more »

0
देववाणी ध्यान देववाणी ध्यान

देववाणी का अर्थ है परमात्मा की वाणी। इस ध्यान प्रयोग में यह भाव रखना है कि मैं केवल माध्यम हूं, वाहन हूं, परमात्मा ही हमारे माध्यम से बोलेग...

Read more »

0
तथाता ध्यान तथाता ध्यान

ओशो कहते हैं कि जब भी मृत्यु का स्मरण आए, कोई भी मौका आए, उससे कुछ न कुछ अनुभव लें। इसके लिए उन्होंने पांच-पांच मिनट के तीन प्रयोग बताए हैं।...

Read more »

0
प्रार्थना ध्यान प्रार्थना ध्यान

ओशो कहते हैं कि प्रार्थना एक भाव दशा है। परमात्मा के साथ, स्वयं के साथ होने की। प्रार्थना में बोल सकते हैं, परन्तु ध्यान रहे तुम्हारी प्रार्...

Read more »

0
श्मशान पर जीवन का उल्लास श्मशान पर जीवन का उल्लास

जीवन का पूरा खेल मुक्तिपथ (श्मशान) बड़हलगंज पर एक साथ दिखता है। एक तरफ उड़ती है मरघट्टी दुर्गंध और दूसरी तरफ तरफ विहंसता है जीवन। वातावरण में ...

Read more »

1
भाद्रपद चतुर्थी को चंद्रदर्शन का निषेध भाद्रपद चतुर्थी को चंद्रदर्शन का निषेध

पं: शरदचंद्र मिश्र के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्‍ल चतुर्थी सिद्धिविनायक चतुर्थी के रूप में जानी जाती है। इसमें किया गया दान, उपवास व पूजा-अर...

Read more »

0
सात प्रकार के शापित योग सात प्रकार के शापित योग

पं शरदचंद्र मिश्र 1- पितृ दोष- यह किसी जातक की जन्मकुण्डली में सूर्य-राहु, सूर्य-शनि दोषों के कारण दोष हो तो इसके लिए नारायण बलि नाग बलि, ग...

Read more »

0
पितृ दोष की शांति के लिए कुछ विशेष उपाय पितृ दोष की शांति के लिए कुछ विशेष उपाय

पं शरदचंद्र मिश्र पितृदोष की शांति के लिए शास्त्रों एवं वास्तु ग्रंथों में कई उपाय कहे गए हैं। 1- अपने गृह की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने...

Read more »

0
धार्मिक आस्था के जैविक स्रोत धार्मिक आस्था के जैविक स्रोत

(इस आलेख का अधिकांश ‘नेचर’ पत्रिका के 23 अक्टूबर 2008 के अंक में प्रकाशित पास्काल बोयर के लेख पर आधारित है) पिछले सौ वर्षों से लगातार कहा ज...

Read more »

0
महंत अवेद्यनाथ पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन महंत अवेद्यनाथ पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन

गुरु गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर के महंत अवेद्यनाथ महाराज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित पुस्तक ‘राष्ट्रीयता के अनन्य साधक’ (तीन खण्डों में )...

Read more »

0
मनोवांछित कार्य की सिद्धि होती है गणेश पूजा से मनोवांछित कार्य की सिद्धि होती है गणेश पूजा से

पं. शरदचंद्र मिश्र गणेश चतुर्थी व्रत 19 सितम्बर दिन बुधवार को है। कृत्य रत्नावली ग्रंथ के अनुसार यह व्रत भाद्रपद चतुर्थी को किया जाता है। ...

Read more »

0
हरितालिका व्रत देता है पति को लम्बी उम्र हरितालिका व्रत देता है पति को लम्बी उम्र

ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र भविष्योत्तर पुराण के अनुसार भाद्र पद शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरितालिका व्रत किया जाता है। स्त्रियां अन्न-ज...

Read more »

0
प्रबोधिनी एकादशी प्रबोधिनी एकादशी

कार्तिक शुक्ल् को देवोत्थान या प्रबोधनी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि अषाढ़ शुक्ल एकादशी (हरिशयनी) एकादशी को भगवान क्षीर सागर में शयन करन...

Read more »

0
सूर्यषष्ठी व्रत सूर्यषष्ठी व्रत

सूर्योपासना का यह पर्व अत्यंत प्राचीन है। महाभारत काल में माता कुंती ने सूर्योपासना के द्वारा अत्यंत तेजस्वी पुत्र कर्ण की प्राप्ति की थी। इ...

Read more »

0
वटसावित्री व्रत वटसावित्री व्रत

ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत की हमारी परंपरा है। यह व्रत महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए रहती हैं। पुराणों के अनुसार इस व्रत...

Read more »

0
शनिवार व्रत शनिवार व्रत

कर्मकाण्डवेत्ता पं. मनोज मिश्र ने कहा कि शनिवार न्यायप्रिय ग्रह शनि का दिन है। शनि राजयोग कारक ग्रह हैं। ये प्रसन्न होने पर राज्य सुख, समृद्...

Read more »

0
शुक्रवार व्रत शुक्रवार व्रत

ज्योतिषाचार्य पं. दयाशंकर मिश्र याज्ञिक ने कहा कि शुक्रवार मूलत: मां दुर्गा के स्वरूप संतोषी माता का दिन है। इस दिन व्रत रहने से मां प्रसन्न...

Read more »

0
गुरुवार व्रत गुरुवार व्रत

ज्योतिषाचार्य डॉ. हरिहरराम त्रिपाठी ने कहा कि वृहस्पतिवार व्रत हर तरह की मनोकामनाएं पूर्ण करता है। इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्...

Read more »

1
बुधवार व्रत बुधवार व्रत

ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र ने कहा कि प्रथम पूज्य आदि देव गणेश की उत्पत्ति बुधवार को हुई थी। इसलिए इस दिन व्रत रहने वाले और आदि देव की ...

Read more »

0
मंगलवार व्रत मंगलवार व्रत

ज्योतिषाचार्य डॉ. जोखन पाण्डेय शास्त्री ने कहा कि मंगलवार के दिन ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। मंगल पाप ग्रह है। इसलिए इस दिन जो हनुमानजी की उ...

Read more »

1
सोमवार व्रत सोमवार व्रत

शास्त्रीय विधान के अनुसार सोमवार सप्ताह का दूसरा दिन है। चंद्रमा ग्रह के आधार पर सोमवार का नाम पड़ता है। अर्थात् सोमवार का चंद्रमा से सीधा सं...

Read more »

0
कर्मकाण्ड व उसका महत्व कर्मकाण्ड व उसका महत्व

कर्मकाण्ड व उसका महत्व वेद आर्य जाति का ही नहीं समस्त मानव जाति का सर्वोच्च साहित्य है। इसमें सवा लाख मंत्रों की व्याख्या हुई है जिसमें...

Read more »

0
भारतीय दर्शन व मूल भारतीय दर्शन व मूल

दर्शन न्‍याय दर्शन प्रमाण, प्रमेय सिद्धान्त, प्रयोजन, संशय, जल्प, छल, वितंडा, हेत्वा भास आदि सोलह पदार्थों की व्याख्या करता है। इनके रह...

Read more »
 
Top