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आगामी वर्ष विश्व पटल पर भारत की मान-प्रतिष्ठा को भारत की कुण्डली में तृतीयस्थ लग्नेश शुक्र बढ़ाएगा। वर्ष के प्रारंभ में भारत कुछ विषयों खासकर कला व क्रीड़ा के क्षेत्र में निराशाजनक व्यवहार कर सकता है किन्तु 11 अप्रैल 2013 के बाद संवत 2060 में उत्साहजनक प्रदर्शन करेगा। विश्व के अन्य देशों के साथ इसके संबंध प्रगाढ़ होंगे तथा तकनीकी क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। सुरक्षा से जुड़े मामलों में विश्व स्तर पर भारत को सहयोग प्राप्त होगा। संवत 2060 के राजा वृहस्पति व मंत्री शनि हैं। देश में धन-धान्य की वृद्धि होगी, खाद्य वस्तुओं में वृद्धि की संभावना बन रही है। राजनैतिक क्षेत्र में लगनस्थ राहु के कारण सत्तापक्ष व विपक्ष में मतभेद बने रहने की संभावना है। सत्ता के विरुद्ध जनता में विद्वेष बढ़ेगा। आंतरिक कलह एवं कुछ राज्यों में सत्ता के विरुद्ध जनता सड़क पर उतर सकती है। धर्मेश वृहस्पति होने के कारण देश में धार्मिक लोगों, संतों, महात्माओं का सम्मान बढ़ेगा। धर्म आधारित राजनीति में वृद्धि की पूर्ण संभावना है। आतंकवाद एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पड़ोसी राष्ट्रों से जुड़े शत्रु वर्ग पराजित होंगे।

वर्ष लग्न कुण्डली में शत्रु स्थान स्थित वृहस्पति शत्रुहंता योग उत्पन्न करेगा। 11 अप्रैल 2013 से अगस्त 2013 के मध्य देश के कई राज्यों में दैवीय प्रकोप व किसी भीषण दुर्घटना की संभावना बन रही है। नवम्बर 2013 से जनवरी 2014 के मध्य किसी बड़ी रेल दुर्घटना, भूकंप या समुद्र तटीय क्षेत्रों में जन-धन की हानि संभावित है। जून 2013 से दिसम्बर 2013 के मध्य कुछ आर्थिक सुधार होने की संभावना है। देश में धार्मिक कृत्य बढ़ेंगे। पापाचार करने वाले सावधान रहें, उन्हें कठोर दंड मिल सकता है।

डॉ. जोखन पाण्डेय शास्त्री
महामंत्री भारतीय विद्वत समिति गोरखपुर

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