0
वास्तु: दिशाओं का साधन एवं परिचय वास्तु: दिशाओं का साधन एवं परिचय

गृह निर्माण से पूर्व दिशा-विदिशाओं का ज्ञान एवं इसका शोधन करना अत्यंत आवश्यक है। दिशा विहीन निर्माण से मनुष्य जीवन भर भ्रमित होकर दु:ख, कष्ट...

Read more »

2
हस्तरेखा: मणिबंध से जीवन विचार हस्तरेखा: मणिबंध से जीवन विचार

शुक्र-चंद्र पर्वत के नीचे हथेली के प्रारंभ में मणिबंध का स्थान होता है। मणिबंध से हथेली का प्रारंभ होता है। किसी-किसी जातक के हाथ में दो रेख...

Read more »

3
होली है एक कथाएं अनेक होली है एक कथाएं अनेक

होली पर्व के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं। पुराणों में कई कथाओं का उल्लेख मिलता है। जहां इसे भक्त प्रहलाद और होलिका से जोड़ा जाता है वहीं...

Read more »

0
शनि ग्रह के कष्टों से निवारण का सुगम उपाय शनि ग्रह के कष्टों से निवारण का सुगम उपाय

भारतीय ज्योतिष में शनि की साढ़ेसाती को ‘वृहद कल्याणी’ और शनि की ढैया को ‘लघु कल्याणी’ कहा जाता है। यदि शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैया चल रही हो और...

Read more »

1
पुण्यदायी है आमलकी एकादशी पुण्यदायी है आमलकी एकादशी

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी इस वर्ष 23 मार्च को पड़ रही है। यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली है। इस दिन व्र...

Read more »

0
पंचांग प्रकरण: योग पंचांग प्रकरण: योग

चंद्रमा और सूर्य के प्रतिदिन स्पष्ट ग्रह गति के जोड़ से योग निर्मित होता है। चंद्र और सूर्य की अंशात्मक दूरी में जब 13 अंश 20 कला का एक भाग प...

Read more »

1
खगोलशात्रियों ने दे दी 13वीं राशि को मान्यता खगोलशात्रियों ने दे दी 13वीं राशि को मान्यता

खगोलविदों ने कुछ वर्ष पूर्व ‘ओफियूकस’ को 13वीं राशि के तौर पर शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। क्योंकि इस राशि को सम्मिलित करने से खगोलीय अध्य...

Read more »

0
ईश्वर का स्वरूप उसकी कृति शक्ति है ईश्वर का स्वरूप उसकी कृति शक्ति है

डन्स स्काटस का दर्शन डन्स स्काटस का जन्म स्काटलैण्ड में हुआ था। ये आक्सफोर्ड में पढ़े थे और कुछ समय तक वहां अध्यापक भी रहे। ये फ्रेन्सिस्कन...

Read more »

1
हाथों की बनावट से रोग विचार हाथों की बनावट से रोग विचार

हथेली पर उत्कीर्ण रेखाएं गर्भावस्था में बंद मुट्ठियों से उत्पन्न सलवटें मात्र नहीं हैं वरन ये व्यक्ति की वर्तमान एवं भविष्य के मन-मस्तिष्क ए...

Read more »

3
परमार्थ ज्ञान तक नहीं पहुंचता तर्क परमार्थ ज्ञान तक नहीं पहुंचता तर्क

मध्ययुगीन पाश्चात्य दर्शन- संत टॉमस एक्विनस का दर्शन संत टॉमस एक्विनस के अनुसार दर्शन का साधन है तर्क और धर्म का श्रुति। एक्विनस का जन्म न...

Read more »

1
संध्या सत्संग से ओशो ध्यान शिविरि का आगाज संध्या सत्संग से ओशो ध्यान शिविरि का आगाज

गोकुल अतिथि गृह सिविल लाइन्स गोरखपुर में ओशो प्रेमियों द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय ओशो नृत्य ध्यान शिविर की शुरुआत 7 मार्च को संध्या सत्संग से ...

Read more »

6
शिवरात्रि ही क्यों, दिन क्यों नहीं ? शिवरात्रि ही क्यों, दिन क्यों नहीं ?

अन्य देवों का पूजन जबकि दिन में ही होता है तब भगवान शंकर को रात्रि ही क्यों प्रिय हुई और वह भी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि ही क्यों? यह बात ...

Read more »

1
शिवरात्रि पर कल्याणकारी पंचाक्षरी व अष्टाक्षरी मंत्रों का प्रयोग शिवरात्रि पर कल्याणकारी पंचाक्षरी व अष्टाक्षरी मंत्रों का प्रयोग

प्राय: शिवजी का व्रत स्त्री-पुरुष दोनों रखते हैं और इसका प्रावधान भी है। शिव चौदश एवं महाशिवरात्रि भी गवान सदाशिव के प्रमुख पर्व हैं। भोले व...

Read more »

1
परम पुण्यदायी है महाशिवरात्रि परम पुण्यदायी है महाशिवरात्रि

10 मार्च दिन रविवार को महाशिवरात्रि है। हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्योदय 6 बजकर 8 मिनट पर और चतुर्दशी तिथि का मान 49 दंड 28 पला अर्थात रात्...

Read more »

0
करोड़ों दोषों को दूर करता है रूद्राभिषेक करोड़ों दोषों को दूर करता है रूद्राभिषेक

भगवान शिव सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाले, पापों का क्षय करने वाले और पुरुषार्थ चतुष्टय की सिद्ध करने वाले हैं। प्राचीन काल से ही दु:साध्य का...

Read more »

1
ओशो ध्यान शिविर का उद्घाटन 7 मार्च को ओशो ध्यान शिविर का उद्घाटन 7 मार्च को

त्रिदिवसीय ओशो ध्यान शिविर का आयोजन 8, 9, 10 मार्च को गोकुल अतिथि भवन सिविल लाइन्स गोरखपुर में किया गया है। शिविर का उद्घाटन 7 मार्च को सायं...

Read more »

3
महाशिवरात्रि महोत्सव-एक पौराणिक विवेचन महाशिवरात्रि महोत्सव-एक पौराणिक विवेचन

शिवरात्रि का अर्थ वह रात्रि है जिसका शिव तत्व के साथ घनिष्ठ संबंध है। भगवान शिव की अतिप्रिय रात्रि को शिवरात्रि कहा जाता है। शिवार्चन व जागर...

Read more »

1
मोक्ष पुरुषार्थ नहीं है मोक्ष पुरुषार्थ नहीं है

महर्षि वात्स्यायन भी चार्वाकों की तरह तीन पुरुषार्थों को ही मानते थे। उन्होंने नैतिक विषयों पर विचार किया है। वह ईश्वरवादी थे लेकिन परलोक को...

Read more »

3
किसी प्रयोजन के लिए नहीं हुई संसार की उत्पत्ति किसी प्रयोजन के लिए नहीं हुई संसार की उत्पत्ति

विश्व के मूल तत्वों के संबंध में चार्वाक का मत उनके प्रमाण संबंधी विचारों पर अवलम्बित हैं। चूंकि प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है इसलिए हम के...

Read more »

1
ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत

चार्वाक विचारधारा के अनुसार प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है। अनुमान, शब्द आदि जितने अप्रत्यक्ष प्रमाण हैं, सभी संदिग्ध या भ्रममूलक हैं। अत: प...

Read more »

3
स्वामी दयानंद और आर्य समाज स्वामी दयानंद और आर्य समाज

19वीं शताब्दी में भारतीय समाज में घोर असमानता तथा अन्याय का बोलबाला था। भारतीय अनेक रूढ़ियों व आडम्बरों के कारण पतन की ओर उन्मुख हो रहे थे। ऐ...

Read more »
 
Top