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कपालभाति प्राणायाम- यानी धरती की संजीवनी। एक सेंकेंड में एक स्ट्रोक, एक मिनट में साठ स्ट्रोक। 10 से 20 मिनट करना है। असाध्य रोगों में 30 मिनट तक किया जा सकता है।
विध- सुखासन, पद्मासन, सिद्धासन में से किसी एक आसन में सुख पूर्वक बैठकर दोनों नासिकाओं से श्वांस को शक्तिपूर्वक बाहर फेंके। झटके से श्वांस फेंकने पर पेट अंदर आएगा, इसी को स्ट्रोक कहते हैं, श्वांस अंदर खींचना नहीं है, बाहर फेंकने के बाद सामान्य रूप से जितनी श्वांस अंदर जाए जाने दें। इसी क्रिया को बार-बार करें। तीव्रता से नहीं सहजता से करें। ऐसा करते हुए स्वाभाविक रूप से पेट में भी आंकुचन व प्रसारण की क्रिया होती है।
श्वांस को बाहर फेंकते समय मन में ऐसा विचार करें कि मेरे शरीर के समस्त रोग बाहर निकल रहे हैं, नष्ट हो रहे हैं। जिसको जो भी शारीरिक रोग हो, उस दोष या विकार हो बाहर छोडऩे के भाव से श्वांस बाहर फेंके। मेरे काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईष्र्या, राग-द्वेष सभी बाहर निकल रहे हैं। मेरे सभी आंतरिक अंग जैसे किडनी, लीवर, पेंक्रियाज सभी स्वस्थ हो रहे हैं।
लाभ- चेहरे की आभा एवं सुंदरता बढ़ाने एवं एकाग्रता के लिए, मोटापा, मधुमेह, गैस, कब्ज, प्रोस्टेट, किडनी, कोलेस्ट्राल, यूट्रेस की गांठें, कैंसर की गांठें, हेपेटाइटिस सभी ठीक होता है। मन में उत्साह, आनंद, निर्भयता व सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।
-द्वारा पतंजलि योग समिति गोरखपुर

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