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गृहस्थ जन दो सितंबर और वैष्णव जन तीन सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाएंगे। जलकल बिल्डिंग व पुलिस लाइन में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से संबंधित झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी। मेला लगेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र व पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार दो सितंबर को सूर्योदय 5:45 बजे और सप्तमी तिथि सायं 05:09 बजे तक है। इसके बाद संपूर्ण रात्रि और अगले दिन तीन सितंबर को दिन में 3:29 बजे तक अष्टमी तिथि है। दो सितंबर को ही रात्रि में अष्टमी तिथि मिल रही है, साथ ही इस दिन सायं 6:29 बजे तक कृतिका नक्षत्र है, इसके बाद रोहिणी नक्षत्र लग रहा है जो रात भर रहेगा। रात्रि को हर्षण योग व बालव करण है। चंद्रमा की स्थिति वृष राशि और रोहिणी नक्षत्र (मध्य रात्रि में) पर होने से गृहस्थों के लिए यह दिन जन्माष्टमी मनाने के लिए मान्य रहेगा। सिद्धांत ग्रंथ धर्मसिंधु में पूर्वविद्धा (सप्तमीयुक्त) अर्धरात्रिकालीन कृष्ण भाद्रपद अष्टमी को ग्रहण करने की आज्ञा दी गई है। व्यास, नारद आदि ऋषियों के अनुसार सप्तमीयुक्त अष्टमी ही व्रत-पूजन आदि के लिए ग्रहण करनी चाहिए। दूसरी तरफ वैष्णव जन विद्धा अष्टमी में व्रत नहीं करते, वे उदय व्यापिनी अष्टमी को प्रधानता देते हैं, चाहे उस दिन रात में अष्टमी तिथि हो या न हो। इसलिए वैष्णव जन का जन्माष्टमी उत्सव तीन सितंबर को है।
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बहुला चतुर्थी 29 अगस्‍त को
गो-पूजा का पर्व बहुला चतुर्थी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि अर्थात 29 अगस्‍त को परंपरागत रूप से आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय 5:42 बजे और तृतीया तिथि सायं 07:36 बजे तक है, इसके बाद चतुर्थी तिथि है। इस दिन शहर की गो-शालाओं व घरों में गो-माता की पूजा की जाएगी।
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हलषष्ठी व्रत एक सितंबर को
संतान के लिए किया जाने वाला हलषष्ठी व्रत एक सितंबर को परंपरागत रूप से मनाया जाएगा। इस दिन व्रती महिलाएं कुश में गांठ देकर संतान की दीर्घायु की कामना करेंगी। इस दिन सूर्योदय 05:44 बजे और षष्ठी तिथि का मान सायं 06:26 बजे तक है। भरणी नक्षत्र व धु्रव नामक योग है। पुराणों के अनुसार इस दिन बलराम जी का जन्म हुआ था। इस दिन शिव परिवार की भी पूजा की जाती है।
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हरितालिका तीज व्रत 12 सितंबर को
अखंड सौभाग्य का रक्षक हरितालिका तीज व्रत 12 सितंबर को परंपरागत रूप से आस्था व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। व्रती महिलाएं निर्जल व्रत रहकर भगवान गौरी-शंकर की उपासना करेंगी और सौभाग्य सामग्रियों का दान करेंगी। इस दिन सूर्योदय 05:52 बजे और तृतीया तिथि सायं 06:38 बजे तक है, इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात्रिशेष 04:45 बजे तक है। सुबह 08:50 बजे तक शुक्ल योग और उसके बाद ब्रह्मयोग है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि भाद्रपद शुक्ल तीन को हरितालिका का व्रत किया जाता है। इसमें मुहूर्तमात्र हो तो भी परा तिथि ग्राह्य की जाती है, क्योंकि द्वितीया पितामह और चतुर्थी संतान की तिथि है, इसलिए द्वितीया का योग निषेध और चतुर्थी का योग श्रेष्ठ होता है।
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गणेश चतुर्थी व्रत 13 सितंबर को
सिद्धि विनायक अर्थात गणेश चतुर्थी व्रत 13 सितंबर को है। पुराणों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न में गणेश जी का जन्म हुआ था। इसी दिन गणेशोत्सव शुरू होता है और दस दिन तक चलता है। इस दिन सूर्योदय 05:52 बजे और चतुर्थी तिथि सायं 05:47 बजे तक है। संपूर्ण दिन व रात्रिपर्यंत स्वाती नक्षत्र व सुस्थिर नामक औदायिक योग है।

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