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शिव परम कल्याणकारी हैं। उनकी कृपा सदैव अपने भक्तों पर बनी रहती है। उनके ऊपर आश्रित भक्त कभी भी निराश नहीं हुआ, जिसने शिव भक्ति की, उसका लोक व परलोक दोनों सुधरा। वह अत्यंत भोले हैं, इसीलिए उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है। वह अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। उनकी कृपा से महापातकी भी परम तत्व को प्राप्त हो जाता है। ऐसी बहुत सी कथाएं मिलती है जिनमें भगवान शिव द्वारा अपने भक्तों को सद्गति प्रदान करने की बात कही गई है। त्रेतायुग में एक धुंधुमूक नामक ब्राह्मण था। उसकी गलतियों के चलते उसका पूरा परिवार नष्ट हो गया। शूद्रों ने उसके परिवार को मार दिया। अंत में धुंधुमूक ने महादेव का पाशुपत व्रत करते हुए रुद्र जप में तत्पर हो बृहस्पति के यहां पहुंचा और उनसे सर्वश्रेष्ठ पंचाक्षर व षडाक्षर मंत्र प्राप्त कर जप करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुआ। पुराणों में चर्चा है कि इन महामंत्रों का भक्तिपूर्वक जप करके विप्र ब्रह्म हत्या जैसे महापातकों से शीघ्र ही मुक्त हो जाता है। उसी प्रकार धुंधुमूक भी मृत्यु उपरांत यमलोक में सम्मानित हो शूद्रों के द्वारा मारे गए अपने स्वजनों का उद्धार कर दिया। साथ ही स्वयं इंद्र सहित सभी देवताओं से स्तुत्य होता हुआ वह गणाध्यक्ष बनकर शिव का अत्यंत प्रिय हो गया। यह है शिव की असीम कृपा का फल।
-रविशंकर दुबे, श्रीबैकुंठनाथ पवहारि संस्कृत महाविद्यालय

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