0
शिव शब्द कल्याण का पर्याय है। भगवान शिव को सावन सर्वाधिक प्रिय है। सावन में कर्क राशि का सूर्य होता है। कर्क राशि जल राशि है। अतएव शिव को जल प्रिय है (जलधारा प्रिय: शिव:)। कर्क राशि का स्वामी होता है चंद्रमा, जो मन का प्रतिनिधित्व करता है। मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण मन ही होता है। भगवान चंद्रशेखर चंद्रमा को अपने शीश पर धारण करते हैं। वह मन को नियंत्रित करने के लिए सद्बुद्धि के लिए ज्ञान गंगा को धारण किए हुए हैं। पुराणों के अनुसार श्रावण मास में ही समुद्र मंथन से विष निकला था, जिसे भगवान नीलकंठ ने जगत कल्याण के लिए धारण कर लिया था। विष ही विषय-विकार है। इसे न मुख में रखा जा सकता और न हृदय में। इसलिए भगवान शिव ने विष को कंठ में रखा। कंठ में यदि इष्ट का नाम हो तो विषय- विकार का परिमार्जन संभव है। साधक भी इसी चक्र पर निरंतर अभ्यासरत रहते हैं। श्रावण मास में ही मां पार्वती ने भगवान शिव की उपासना की थी। श्रावण का शब्दिक अर्थ 'कानÓ होता है। कान का गुण सुनना होता है। परंतु सत्य को सुनना ही सार्थक है, जो शिव हैं। सत्य को जानना ही सुंदर है। भगवान वेद व्यास ने भी श्रीमद्भागवत महापुराण में मंगला चरण और उपसंहार में भी इसी शब्द को रखा है। श्रावण मास में ही शिव ने मां पार्वती को कथा सुनाई थी। आज भी इस मास में प्राय: सभी मंदिरों और घरों में कथा की प्रथा है। श्रावण मास प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करता है। भगवान शिव भी प्रकृति के देवता हैं। पूरे माह शिव के साथ प्रकृति और नाग आदि की पूजा होती है। पूरे मास शिव पूजन कर लेने से भगवान शिव पर भक्त की रक्षा का दायित्व होता है।
-आचार्य पंडित हरीन्द्र नारायण दूबे, ज्योतिर्विद्

Keywords: shiv, savan

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top